बाजार में 300 से अधिक थोक दुकानें हैं। आसपास के कस्बों के फुटकर व्यापारी यहां पर खरीदी के लिए आते हैं। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार कुछ फुटकर व्यापारी एक थोक व्यापारी की बकाया रकम रोककर दूसरे व्यापारी से माल लेने लगे थे। इस प्रवृत्ति से कई व्यापारियों की रकम रुक गई, इसलिए ब्लैक बोर्ड लगाने पड़े। प्रारंभ में कुछ डिफाल्टरों के नाम इसमें लिखे गए। इसके बाद बकायादार खुद आकर रकम देने और आग्रह करने लगे कि हमारा नाम मत लिखो। संघ के महासचिव दिनेश वाधवानी के अनुसार कुछ समय से बोर्ड पर किसी का नाम लिखने की जरूरत नहीं पड़ी।
अब वाट्सएप ग्रुप बनाकर वसूली
संघ ने तकनीक का सहारा लेत हुए अब व्यापारियों का वाट्सएप ग्रुप बनाया है। इसमें सभी थोक व्यापारी जुड़े हुए हैं। यदि किसी फुटकर व्यापारी ने रकम रोकी तो उसे पहले चेतावनी दी जाती है। इसके बाद उस फर्म का नाम वाट्सएप समूह पर सार्वजनिक कर दिया जाता है। संघ के अध्यक्ष कन्हैया इसरानी के अनुसार यदि किसी को डिफाल्टर घोषित कर दिया गया तो कोई भी थोक व्यापारी उसे माल नहीं देता है। कुछ डिफाल्टरों को ब्लैक लिस्ट किया गया तो दूसरे डिफाल्टर स्वयं ही बकाया रकम देने आने लगे। इसरानी के अनुसार पिछले कुछ समय से कारोबार में मुनाफा बहुत कम रह गया है। सूरत एवं मुंबई की मिलों में थोक व्यापारियों को माल आते ही रकम देनी पड़ती है। ऐसे में थोक व्यापारी अधिक समय की उधारी देने की स्थिति में नहीं हैं। यही कारण है कि हमें ब्लैक बोर्ड लगाने एवं वाट्सएप समूह बनाने की जरूरत पड़ी है।