जिस रफ्तार से रेंग रहा पाकिस्‍तान भीख मांगने के सिवा नहीं कोई मुकाम, बजट से एक दिन पहले सामने आई रोती तस्‍वीर!

Updated on 12-06-2024 01:41 PM
नई दिल्‍ली: पाकिस्‍तान बेहाल है। एटम बम पर इतराने वाले मुल्‍क के लोगों की थाली में न रोटी है न दाल है। बुधवार को पाकिस्‍तान का बजट पेश होने वाला है। इसके आने से पहले ही इस्‍लामी देश की बदहाली का नमूना सामने आ गया है। जिस रफ्तार से पाकिस्‍तानी अर्थव्‍यवस्‍था रेंग रही है, उसके सामने भीख मांगने के सिवा कोई रास्‍ता नहीं दिखता है। पाकिस्तान की ग्रोथ 2023-24 में टारगेट से कम 2.38 फीसदी रही है। वह अपने 3.5 फीसदी के लक्ष्य से बुरी तरह चूक गया है। सरकार ने बजट पेश करने के एक दिन पहले मंगलवार को वित्त वर्ष 2023-24 का आर्थिक सर्वे जारी किया। इसके मुताबिक, जुलाई 2023-जून 2024 के दौरान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 2.38 फीसदी की दर से बढ़ी है। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने इसे पेश किया।

ग्रोथ या बारूद... बजट में रहेगा क‍िस पर फोकस?

सर्वे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में वास्तविक जीडीपी लक्ष्य से कम रहने के बावजूद सरकार के विवेकपूर्ण नीति प्रबंधन और क्रमिक आर्थिक सुधारों के कारण सकारात्मक दायरे में आ गई। वित्त वर्ष 2022-23 में पाकिस्तान की जीडीपी की निगेरिटव ग्रोथ रही थी। यह ग्रोथ निवर्तमान वर्ष के लिए अनुमानित लक्ष्य 3.5 फीसदी से कहीं कम है। सरकार इसे हासिल करने में नाकाम रही है। इसकी मुख्य वजह उद्योगों और सेवा क्षेत्रों का खराब प्रदर्शन रहा।
बुधवार को पेश होने वाले बजट में पाकिस्‍तान सरकार का फोकस इकनॉमिक ग्रोथ को रफ्तार देने के साथ नौकरी के मौके बढ़ाने पर रहने की उम्‍मीद है। वित्‍त वर्ष 2024-25 के बजट में लोगों को राहत देने के लिए कई बड़े ऐलान हो सकते हैं। हालांकि, पाक‍िस्‍तान ग्रोथ से ज्‍यादा गोली-बारूद पर फोकस करने के ल‍िए बदनाम रहा है।

कृष‍ि क्षेत्र में दिख रही हैं उम्‍मीदें

इकनॉमिक सर्वे पेश करते हुए पाकिस्तानी वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र ने 3.5 फीसदी के लक्ष्य के मुकाबले 6.25 फीसदी की ग्रोथ दर्ज कर बाकी सभी क्षेत्रों से बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, औद्योगिक विकास की ग्रोथ सिर्फ 1.21 फीसदी रही। सेवा क्षेत्र ने भी 3.6 फीसदी लक्ष्य के मुकाबले 1.21 फीसदी की ही ग्रोथ हासिल की।
औरंगजेब के मुताबिक, कृषि क्षेत्र पिछले 19 सालों की सर्वाधिक ग्रोथ के साथ वित्त वर्ष 2023-24 में आर्थिक विकास का प्रमुख जरिया बनकर उभरा है। समीक्षाधीन अवधि में राजकोषीय घाटा 3.7 फीसदी दर्ज किया गया। यह पिछले साल के समान ही है। इस दौरान पाकिस्तान का व्यापार घाटा 4.2 फीसदी पर रहा। यहां बता देते हैं कि पाकिस्तान का वित्त वर्ष जुलाई से शुरू होकर जून तक चलता है।

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