
भोपाल के तुलसीनगर-शिवाजी नगर इलाके में मंत्री-विधायकों के बंगलों के लिए 29 हजार से ज्यादा पेड़ काटे जाने के प्लान का विरोध हो रहा है। लगातार 2 दिन से महिलाएं, बच्चे सड़क पर उतरे। महिलाएं तो पेड़ों से चिपक कर भावुक हो गईं। शुक्रवार को भी चिपको आंदोलन चलेगा। शिवाजी नगर स्थित नूतन कॉलेज के सामने सैकड़ों लोग जुटेंगे और पेड़ काटे जाने का विरोध करेंगे।
पेड़ काटे जाने के विरोध में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा समेत कांग्रेसियों ने पहले ही मोर्चा संभाल रखा है। वहीं, दो दिन से महिलाएं भी मैदान में उतर रही हैं। दूसरी ओर, भोजपाल जन कल्याण एवं विकास परिषद भी पेड़ों के काटे जाने के विरोध में है। इसे लेकर बैठक भी हो चुकी है। पर्यावरणविद् उमाशंकर तिवारी ने बताया, 29 हजार पेड़ों को बचाने के लिए सड़क पर उतरेंगे। ये पेड़ 50 से 70 साल तक पुराने हैं। 14 जून को शाम 6 बजे नूतन कॉलेज के सामने शिवाजी नगर में पेड़ों का पूजन रक्षा सूत्र बांधकर पेड़ों की रक्षा का वचन दोहराएंगे।
दो दिन से हो रहा प्रदर्शन
पेड़ों को काटे जाने के विरोध में दो दिन से प्रदर्शन हो रहा है। बुधवार को 5 नंबर स्टॉप पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो चुका है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे, लोकसभा चुनाव के कांग्रेस कैंडिडेट रहे अरुण श्रीवास्तव, नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी, पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान, पूर्व पार्षद अमित शर्मा ने मोर्चा संभाला था।
गुरुवार को शिवाजी नगर एवं तुलसी नगर की महिलाएं पेड़ों से चिपक गई थीं। महिलाओं ने कहा कि पेड़ काटे जाते हैं तो उग्र प्रदर्शन करेंगे। फिर चाहे सरकार उन्हें जेल में ही क्यों न बंद कर दें। प्लान को सरकार मंजूर न करें।
पूरे राजधानी परियोजना परिक्षेत्र का प्लान बने
भोपाल की हरियाली पर एआई के जरिए अध्ययन करने वाली टाउन प्लानर रॉयल इंस्टीट्यूट अॉफ ब्रिटिश आर्किटेक्ट की सदस्य डॉ. शीतल शर्मा ने कहा कि 1956 में भोपाल के राजधानी बनने के बाद उस समय की तकनीक और परिस्थितियों के अनुसार नए भोपाल का प्लान बना था।
इस राजधानी परियोजना परिक्षेत्र में टीटी नगर, तुलसी नगर, शिवाजी नगर सहित आसपास का क्षेत्र शामिल था। अब जरूरतें बदल गईं हैं साथ ही नई तकनीक भी आ गईं हैं। शहर के मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट बन रहा है। यह सबसे अच्छा मौका है जब इस पूरे इलाके की प्लानिंग दोबारा की जाए और उसमें फोकस ग्रीनरी पर हो। इस ग्रीनरी को बरकरार रखते हुए प्लानिंग करके भोपाल देश और दुनिया में उदाहरण बन सकता है।
कोर्ट की शरण में भी जाएंगे
पेड़ों की रक्षा के लिए शहर के सांसद, विधायक और अधिकारियों के पास जाएंगे। जरूरत पड़ी तो कोर्ट की शरण में जाएंगे।