
भोपाल में ब्राह्मण समाज ने आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। रविवार सुबह प्रदर्शनकारी रोशनपुरा चौराहे पर इकट्ठा हुए। नारेबाजी करते हुए सीएम हाउस की ओर बढ़े। पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो धक्कामुक्की करने लगे।
प्रदर्शनकारी वर्मा की तत्काल गिरफ्तारी और सेवा से बर्खास्तगी की मांग कर रहे थे। वे रोशनपुरा चौराहे पर पुलिस घेराबंदी तोड़ते हुए बाणगंगा चौराहे तक पहुंच गए। बैरिकेडिंग के बावजूद आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। स्थिति संभालने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन चलानी पड़ी।
धक्का-मुक्की के दौरान कई बुजुर्ग और महिलाएं घायल हो गईं। मौके पर मौजूद एम्बुलेंस और मेडिकल टीम ने प्राथमिक उपचार दिया। तनावपूर्ण हालात को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
प्रदर्शनकारियों को गाड़ियों में भरकर पुलिस रातीबड़ ले गई। यहां तितर-बितर करने के बाद प्रदर्शन शांत किया जा सका।
राज्य सरकार ने भेजा बर्खास्तगी का प्रस्ताव ब्राह्मण बेटियों को लेकर आपत्तिजनक कमेंट करने वाले सीनियर आईएएस संतोष कुमार वर्मा की बर्खास्तगी का प्रस्ताव राज्य सरकार, केंद्र को भेज चुकी है। हालांकि, प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने जो प्रस्ताव भेजा है, वह अधूरा है।
प्रस्ताव में यह साफ नहीं है कि सरकार संतोष वर्मा को बर्खास्त करना चाहती है या सिर्फ उनका प्रमोशन रद्द करना चाहती है। इस अस्पष्टता के कारण केंद्र सरकार प्रस्ताव को वापस भी कर सकती है।
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव फरहीन खान के हस्ताक्षर से 12 दिसंबर को यह प्रस्ताव कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजा गया था। इसमें संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है, लेकिन कार्रवाई के ठोस कारण स्पष्ट रूप से नहीं बताए गए हैं।
सरकार किस आधार पर बर्खास्तगी चाहती है, जिक्र नहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार ने बातचीत में कहा कि प्रस्ताव में यह नहीं बताया गया है कि सरकार किस आधार पर बर्खास्तगी चाहती है। प्रस्ताव में सिर्फ यह लिखा गया है कि अलग-अलग संगठनों से ज्ञापन मिले हैं और संतोष वर्मा के बयान से सामाजिक तनाव बढ़ा है।
प्रमोशन रद्द या बर्खास्तगी...रुख साफ नहीं पूर्व मुख्य सचिव ने कहा कि प्रस्ताव की सबसे बड़ी कमी यह है कि सरकार का फैसला साफ नहीं दिखता। एक तरफ प्रमोशन रद्द करने की बात है, तो दूसरी ओर बर्खास्तगी की मांग भी लिखी गई है।दोनों मामलों की प्रक्रिया अलग होती है और इसके लिए अलग-अलग सबूत जरूरी होते हैं।
सामाजिक संगठन अभी संतुष्ट नहीं मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी सेवा संघ, अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज, ब्राह्मण रेजिमेंट सहित अन्य संगठनों ने प्रस्ताव भेजे जाने को सही कदम बताया है। लेकिन उनका कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होना चाहिए।
संगठनों का कहना है कि प्रस्ताव भेजना पहली सफलता है, लेकिन अंतिम फैसला नहीं। इसी वजह से आगे भी आंदोलन जारी रखने की तैयारी की जा रही है।