यारों के यार थे धर्मेंद्र! अनीता राज, सायरा बानो, अनिल शर्मा, नील नितिन की जुबानी दिल छू लेने वाले 5 किस्‍से

Updated on 25-11-2025 01:52 PM
'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' की सफलता के प्रेस कॉन्फ्रेंस का वो यादगार पल आज भी दिल में ताजा है। सितारों से जगमगाते और मीडिया से खचाखच भरे उस हॉल में जब धर्मेंद्र से शबाना आजमी संग उनके किसिंग सीन पर सवाल पूछा गया, तो उनके जवाब ने पूरा माहौल ठहाकों से भर दिया था। मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा था, 'अरे, ये तो मेरे बाएं हाथ का खेल है। बहुत मजा आया… और जब-जब मौका मिलता है, मैं ऐसे छक्के लगा देता हूं।' साल 2023 में 87 की उम्र में भी इतनी दिलकश शरारत और ऐसी जिंदादिली… ये सिर्फ और सिर्फ धरम पाजी के बस की बात थी। आज, 89 की उम्र में जब सिनेमा का यह ही-मैन हमारी आंखों से ओझल हो गया है, तो एहसास होता है, उनका ‘ही-मैन’ होना सिर्फ किरदारों का कमाल नहीं था। वे खुद कई रंगों में सजी शख्सियत रहे। एक शायर, एक बेइंतहा मोहब्बत करने वाले प्रेमी, एक स्नेही पिता और सबसे बढ़कर… यारों के यार।

धर्मेंद्र को करीब से जानने वाले हर किसी को पता है, वो दिल के सच्चे और जिंदादिली की मिसाल थे। फिल्म इंडस्ट्री उन्हें सिर्फ सुपरस्टार नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में याद कर रही है, जिसने अपनी मुस्कान से लोगों के जख्मों पर मरहम रखा, और अपनी जिंदादिली से बार-बार साबित किया कि दुनिया में हर कोई कांटों का खरीदार नहीं होता, कुछ लोग फूल बांटने के लिए ही पैदा होते हैं, और धर्मेंद्र उन्हीं में से थे।

दिलीप साहब के जाने के बाद सहारा बने धरम जी

'ये यकीन करने वाली खबर नहीं है… वो तो ठीक हो रहे थे, वेंटिलेटर से हटने वाले थे।' इतना कहकर सायरा बानो फफक पड़ती हैं। दिलीप कुमार के बाद जिन पर उन्होंने सबसे ज्यादा भरोसा किया, वही धरम आज उनसे बिछड़ गए। धर्मेंद्र के साथ 'आई मिलन की बेला', 'आदमी और इंसान', 'ज्वार भाटा', 'साज़िश' और 'पॉकेटमार' जैसी फिल्मों में काम करने वाली सायरा बानो रुंधे गले से कहती हैं, 'वे मेरे लिए परिवार जैसे थे… दिलीप साहब के भाई, और मेरे दिल के बेहद करीब। हमारा पुराना, गहरा रिश्ता। था वो कभी भी घर आ जाते, घंटों बैठकर बातें होतीं, साथ खाना-पीना चलता और कई बार शायरी का दौर भी।'

सायरा बानो बोलीं- धरम जी ने दिलीप साहब के साथ हाथ थाम लिया

दिलीप साहब के जाने के बाद धर्मेंद्र ने सायरा बानो को जिस तरह सहारा दिया, उसे याद करते हुए वह कहती हैं, 'उनके जाने के बाद मैं बहुत टूटी थी… तब धरम जी ने सचमुच मेरा हाथ थाम लिया था। पहली बार मैं उनसे 'शादी' फिल्म की शूटिंग में मिली थी। रोल छोटा था, मगर उनकी हैंडसम, सजीली मौजूदगी ने पहली ही नजर में असर छोड़ा। 'आई मिलन की बेला' से वो स्टार बन गए, लेकिन उनके दिल में दिलीप साहब के लिए हमेशा इज्ज़त और मोहब्बत रही।'

'ईद को धरम जी हमारे घर आकर शीर खुरमा खाते थे'

वह आगे बताती हैं कि कैसे 1952 में 'शहीद' देखकर धर्मेंद्र इतने प्रभावित हुए कि लुधियाना से मुंबई चले आए और बाद में उनके और दिलीप साहब के बीच एक अटूट रिश्ता बन गया। सायरा कहती हैं, 'चाहे ठंड में दिलीप साहब का उन्हें स्वेटर ओढ़ाना हो, या हर ईद को धरम जी का हमारे घर आकर शीर खुरमा खाना… उनकी जिंदादिली माहौल को रोशन कर देती थी। उनके जाने का सदमा बहुत गहरा है… मगर मेरे जेहन में उनकी मुस्कुराती हुई सूरत हमेशा जिंदा रहेगी।'

धर्मेंद्र सात-आठ फिल्मों में नहीं ली फीस, दोस्‍ती को रखा आगे

इंडस्ट्री के सबसे हैंडसम हीरो कहलाने वाले धर्मेंद्र को बॉलीवुड में ब्रेक देने वाले निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी थे। 1960 में आई ये फिल्म थी 'दिल भी तेरा हम भी तेरे', मगर यह शायद ही लोग जानते हों कि इंडस्ट्री में पहली फिल्म देने वाले निर्देशक अर्जुन हिंगोरानी का कर्ज धर्मेंद्र ने ताउम्र उतारा। धर्मेंद्र के साथ 'नौकर बीवी का', 'गुलामी', 'जीने नहीं दूंगा' जैसी कई फिल्मों में काम कर चुकी जानी-मानी अभिनेत्री अनीता राज, जज्बाती होकर बताती हैं, 'धरम जी जैसा दरियादिल स्टार कोई हो ही नहीं सकता। उन्हें ब्रेक देने वाले अर्जुन हिंगोरानी मेरे चाचा रहे हैं। उन्होंने जब धरम जी को इंडस्ट्री में एंट्री दिलाई, तो उस बात को धरम कभी भूले नहीं और आपको शायद यकीन न आए कि मेरे चाचा के साथ आगे चलकर उन्होंने 'कब क्यों और कहां', 'कौन करे कुर्बानी', 'खेल खिलाड़ी का', 'कातिलों के कातिल', 'करिश्मा कुदरत का', 'कैसे कहूं कि प्यार है', और 'सल्तनत' जैसी कई फिल्मों में काम किया, मगर कभी अपनी फीस नहीं ली।

धरम जी ने कहा- मैं अब तुझसे पैसे लूंगा!

अनीता राज आगे कहती हैं, 'मेरे चाचा जब भी उनसे उनकी प्राइस मनी की बात करते, वे कहते- 'अरे अर्जुन, क्या बात कर रहा है? मैं अब तुझसे पैसे लूंगा! मैं ये कैसे भूल सकता हूं कि मेरे लिए इंडस्ट्री के दरवाजे खोलने वाले तो ही थे।' अब आप ही सोचिए ऐसा कौन-सा स्टार होगा जो डायरेक्टर-प्रोड्यूसर से एक नहीं बल्कि 7-8 फिल्मों का मेहनताना न ले?

'हुकूमत' की शूटिंग रुकी, तो अपनी जेब से दिए ढाई लाख रुपये

धर्मेंद्र सही मायनों में यारों के यार थे। उनके साथ का एक ऐसा ही किस्सा बयान करते हुए फिल्मकार अनिल शर्मा इमोशनल हो जाते हैं। वे कहते हैं, 'द बर्निंग ट्रेन' (1980) के समय मैं निर्देशक रवि चोपड़ा का असिस्टेंट था। उस वक्त मैं मात्र 17-18 साल का था और तब भी सेट पर उन्होंने मुझे प्यार से अपनाया था। बाद में जब साल 1987 में उन्हें लेकर मैंने बतौर निर्देशक एक फिल्म शुरू की। वे खुशी-खुशी राजी हो गए थे। मैं कैसे भूल सकता हूं, उस दिन को जब सेट पर 400 लोग मौजूद थे। फिल्म की शूटिंग को 40 दिन हो गए थे और अचानक शूटिंग बंद करनी पड़ी, क्योंकि फाइनैंसर ने पैसा नहीं भेजा। मैं बहुत परेशान था, जब धरम जी को पता चला, तो उन्होंने मुझे अपने पास से ढाई लाख रुपये दिए और कहा, शूटिंग रुकनी नहीं चाहिए, अच्छी फिल्म बनाओ। वो फिल्म थी 'हुकूमत', जो मेरे करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।'

लाइटमैन के छाले देखकर पसीज गए थे धरम जी

इंडस्ट्री में 'गरम धरम' के नाम से जाने जाने वाले धर्मेंद्र के नरम पहलू के बारे में अनीता राज बताती हैं, 'मेरे करियर का शुरूआती दौर था और लीड एक्ट्रेस के रूप में 'नौकर बीवी का' मेरी पहली फिल्म थी, जिसमें धरम जी मेरे हीरो थे। सेट पर पहले दिन उन्होंने मुझे महसूस नहीं होने दिया कि मैं न्यूकमर हूं। वे तो सेट पर तूफान की तरह एनर्जी लाते और रौशनी की तरह छा जाते थे। उनकी सखावत (दानशीलता) की कोई मिसाल नहीं। अक्सर उनसे मिलने वालों का तांता लगा रहता था और वे लगातार आर्थिक रूप से लोगों की मदद कर रहे होते थे। वे दिल के बेहद नरम थे।'

जयपुर में तेज गर्मी थी, लाइटमैन के पास छतरी नहीं होती थी

अनीता राज ने आगे सुनाया, 'मुझे याद है एक बार हम लोग एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे जयपुर में, जान लेने वाली भीषण गर्मी थी। तब वैनिटी वैन भी नहीं हुआ करते थे। रेगिस्तान में हम कलाकारों के लिए बड़ी-बड़ी छतरियों का इंतजाम था, मगर लाइटमैन के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। सेट पर मौजूद लाइटमैन के पैरों में गर्मी के मारे छाले पड़ गए थे। उसके छाले देखकर धरम जी का दिल पसीज गया, उन्होंने उसे अपने पास बुलाया और छतरी के नीचे बैठाया। इतना ही नहीं सेट पर क्रू मेंबर्स के लिए और छतरियों के इंतजाम की भी ताकीद की।'

'मुझे थप्पड़ मार कर खुद भी रो पड़े थे'

यह संयोग ही है कि धर्मेंद्र की विदाई से ठीक पहले उनकी आखिरी फिल्म 'इक्कीस' का मोशन पोस्टर रिलीज किया गया। निर्देशक श्रीराम राघवन ही वो निर्देशक है, जिहोने 'इक्कीस' से पहले भी 'जॉनी गद्दार' में धर्मेंद्र को यादगार भूमिका दी थी। 'जॉनी गद्दार' में धर्मेंद्र के साथ अपने करियर का आगाज करने वाले नील नितिन मुकेश दुखी आवाज में कहते हैं, 'बहुत सैड महसूस कर रहा हूं। यह संयोग ही था कि उनकी पहली फिल्म 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' में उनका पहला गाना, 'मुझको इस रात की तन्हाई में आवाज न दो' मेरे दादू (लीजेंड सिंगर मुकेश) ने ही गाया था और मेरी पहली फिल्म उनके साथ ही थी। सेट पर जब मैंने उन्हें अपने दादू की कमी का जिक्र करते हुए कहा था कि मैं दादू से कभी मिल नहीं पाया, तो उनका कहना था, 'आज से मैं तेरा दादू हूं।' वाकई उन्होंने मुझे बहुत प्यार दिया। एक सीन में उन्हें मुझे एक थप्पड़ मारना था और उस समय फ्लो-फ्लो में उनका ज़ोरदार थप्पड़ असली में मेरे गालपर पड़ गया। मेरी आंखों से आंसू निकल आए। उन्हें बहुत अफसोस हुआ कि असली का थप्पड़ पड़ गया, तब वे भी रो पड़े थे।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 15 March 2026
रायपुर।सपनों को उड़ान देने के लिए पंख नहीं, साहस और संकल्प की जरूरत होती है। इसी बात को सत्य साबित किया है छत्तीगसढ के धमतरी की एक साधारण लेकिन जुझारू…
 15 March 2026
रायपुर।ग्रामीण अंचल की महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वावलंबन का नया सवेरा छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं ने लाया है। सरगुजा जिले के ग्राम गुमराकलां की रहने वाली श्रीमती…
 15 March 2026
रायपुर।राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि समृद्ध और सुलभ ग्रामीण भारत के लिए मज़बूत आधारभूत संरचना आवश्यक है। पुल केवल दो छोरों को नहीं जोड़ते, बल्कि जीवन, अवसर और…
 15 March 2026
रायपुर।इमली प्रसंस्करण समिति चितापुर की महिला समूह की दीदियों ने अपनी मेहनत और लगन के बूते यह सिद्ध कर दिया है कि यदि ग्रामीण संसाधनों का सही तरीके से प्रसंस्करण…
 15 March 2026
रायपुर।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही…
 15 March 2026
रायपुर।आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI), नवा रायपुर द्वारा 13–14 मार्च 2026 को आयोजित आदि परब–2026 कार्यक्रम “From Tradition to Identity” थीम के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारत सरकार…
 15 March 2026
रायपुर।जशपुर वनमंडल अंतर्गत दो अलग-अलग स्थानों पर लगी वनाग्नि को वन विभाग की त्वरित कार्यवाही से समय रहते नियंत्रित कर लिया गया है। इसके फलस्वरूप बड़ी वन क्षति होने से…
 15 March 2026
रायपुर। राज्य में पेट्रोलियम पदार्थों की नियमित उपलब्धता और सुचारू वितरण सुनिश्चित करने के लिए रायगढञ जिला प्रशासन सतर्क है। छत्तीसगढ़ शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग…
 15 March 2026
भोपाल, राजधानी के कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में अब 20 मार्च से महिलाओं को नि:संतानता (इन्फर्टिलिटी), पीसीओएस, सर्वाइकल कैंसर, मोटापा, मेनोपॉज, और अनियमित मासिक धर्म जैसी समस्याओं का इलाज मिलेगा। अस्पताल…
Advt.