
भोपाल : प्रदेश में डाक्टरों की सबसे बड़ी संस्था मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल में अब उनका ही प्रतिनिधि निर्णय लेगा। पहली बार काउंसिल में चुनाव होने जा रहे हैं। इसमें काउंसिल में पंजीकृत सभी डाक्टर मतदान करेंगे। चुनाव प्रक्रिया जुलाई में शुरू करने की तैयारी है। सितंबर में मतदान होगा। काउंसिल में 55 हजार डाक्टर पंजीकृत हैं। हालांकि, इनमें कुछ दूसरे राज्यों में और कुछ विदेश चले गए हैं। कुछ डाक्टरों का निधन हो गया। इस तरह निजी और सरकारी मिलाकर 23 हजार डाक्टर ही हैं, जो भोपाल आकर मतदान करेंगे। पहली बार चुनाव होने के चलते डाक्टरों में भी बेहद उत्साह है।
दरअसल, मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की जगह बना नेशनल मेडिकल (कमीशन) डाक्टरों के पंजीयन और उसके नवीनीकरण को लेकर कई बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। इसके पहले सभी राज्यों की मेडिकल काउंसिल में प्रविधान के अनुरूप चुनाव कराने के लिए कहा गया है। काउंसिल में पंजीकृत सभी डाक्टर मतदाता होंगे। अब देखना होगा कि इनमें कितने डाक्टर भोपाल आकर मतदान करते हैं।
काउंसिल, वेटरनरी काउंसिल, डेंटल काउंसिल जैसी कई संस्थाएं अपने अध्यक्ष व कार्यकारिणी का चुनाव करती हैं। मेडिकल काउंसिल में भी प्रविधान है, पर डाक्टरों में ही कई गुट होने के चलते चुनाव पर सहमति नहीं बन पा रही थी। ऐसे में सरकार भी रुचि नहीं ले रही थी। निर्वाचित अध्यक्ष नहीं होने पर स्वास्थ्य या चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त या संचालक को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाती रही है।
मेडिकल काउंसिल डाक्टरों का पंजीयन, पंजीयन के नियम, डाक्टरों के विरुद्ध आने वाली शिकायतों की सुनवाई करती है। उन पर निगरानी के लिए नियम बनाती है। समय-समय पर काउंसिल की बैठके होती हैं, जिनमें महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं।