ज्ञात हो कि महापौर मालती राय शाहपुरा झील पर श्रमदान करने के लिए कुछ दिन पहले पहुंची थीं। तब उनकी नजर इस कियोस्क पर पड़ी थी। तब उन्होंने झील किनारे हुए अवैध निर्माण को हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन निगम के भवन अनुज्ञा शाखा के इंजीनियरों ने सिर्फ कियोस्क के टायलेट तोड़ कर खानापूर्ति की है। शेष कियोस्क को छोड़ दिया गया है। इससे भवन अनुज्ञा शाखा के इंजीनियरों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले को लेकर जागरूक नागरिकों का कहना है कि निगमायुक्त को इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवानी चाहिए।