
विद्या नगर के बेशकीमती प्लॉट का फर्जी मालिक बनकर एक महिला को बेचने के मामले की जांच अब भोपाल डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडीए) तक पहुंचेगी। क्राइम ब्रांच को शक है कि इस प्लॉट की खरीद-फरोख्त में योजनाबद्ध तरीके से एक सिंडिकेट ने काम किया है। प्लानिंग ऐसी रही कि विज्ञापन देकर प्लॉट की जाहिर सूचना जारी की गई।
फिर रजिस्ट्री के मूल दस्तावेज गुमने की शिकायत बागसेवनिया थाने में दर्ज करवाई। इससे पहले बीडीए से प्लॉट का लेआउट हासिल कर उप पंजीयक कार्यालय से फर्जी तरीके से उसकी रजिस्ट्री भी करवा ली गई। इस धांधली में खास पहलू ये भी है कि असल प्लॉट मालिक के नाम से जो आधार, वोटर आईडी और पैन कार्ड रजिस्ट्री के लिए लगाए गए, वो सभी फर्जी हैं। इनमें नाम तो असल प्लॉट मालिक का है, लेकिन तस्वीर किसी और की है।
एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच शैलेंद्र चौहान का कहना है कि इस मामले में फिलहाल 6 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। आरोपियों में खरीदार रंजना दुबे, दीपक मिश्रा, सूरज दुबे, सर्विस प्रोवाइडर वंदना मोदरे और उप पंजीयक बृजेंद्र शुक्ला शामिल हैं। पुलिस ने ये कार्रवाई अनिल साखी के आवेदन के आधार पर की है।
अनिल हैदराबाद की एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर हैं। एडिशनल डीसीपी का कहना है कि फिलहाल सभी आरोपियों के बयान लिए जाएंगे। इसके बाद ही उनकी असल भूमिका सामने आ सकेगी और ये खुलासा होगा कि ये किसी सिंडिकेट का काम है या केवल दलालों ने मिलकर इस गड़बड़ी को अंजाम दिया है।
समझें... किस तरह रची गई धोखाधड़ी की साजिश
विद्या नगर स्थित 1500 वर्गफीट के इस प्लॉट की जाहिर सूचना 23 नवंबर 2023 को प्रकाशित करवाई गई। इसके 22 दिन बाद यानी 15 दिसंबर को प्लॉट की रजिस्ट्री की मूल कॉपी गुम होने की शिकायत बागसेवनिया थाने में दर्ज करवाई गई। 5 अप्रैल 2024 को बीडीए ने बगैर कोई दस्तावेज देखे इस प्लॉट का नामांतरण भी कर दिया। इससे पहले फर्जी आधार, वोटर आईडी और पैन कार्ड की मदद से प्लॉट की फर्जी रजिस्ट्री भी करवा दी गई।
बीडीए में रोज आती हैं ऐसी दो-तीन शिकायतें
बीडीए के प्लॉट में इस तरह की गड़बड़ी का ये कोई पहला मामला नहीं है। बीडीए सूत्रों का कहना है कि इस तरह की शिकायतें लेकर यहां रोजाना दो-तीन लोग आते ही हैं। अब पुलिस ये भी पता लगा रही है कि कहीं ये पूरी गड़बड़ी बीडीए और उप पंजीयक कार्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से तो नहीं हुई है?