
भोपाल में एटीएम में फ्रॉड का एक मामला सामने आया है। जिसमें एटीएम मशीन से ही किसी ने एटीएम क्लोन कर युवक के खाने से पैसे निकाल लिए। इसकी शिकायत साइबर पुलिस से की गई है। साइबर पुलिस का कहना है कि शिकायत पर मामले की जांच की जा रही है। अभी फिलहाल इस बारे में कुछ साफ नहीं कहा जा सकता है।
यह है मामला
कोलार के रहने वाले सुनील मालवीय ने पुलिस से शिकायत की है कि 23 जून को दोपहर 12:30 से 1 बजे के बीच मां के लिए कुछ पैसे निकालने के लिए दानिश कुंज कोलार के पास लगे एसबीआई एटीएम पर पहुंचा।
यहां जैसे ही एटीएम कार्ड मशीन में डाला, तेज आवाज के साथ एटीएम अंदर चला गया। कुछ देर तक आवाज आती रही। मुझे लगा एटीएम खराब है क्योंकि स्क्रीन पर भी कुछ नहीं दिख रहा था, और बार-बार कैंसिल बटन दबाने पर वहां कुछ नहीं हो रहा था।
फर्जी नंबर से आया कॉल
इसके बाद मुझे लगा मशीन खराब है इसलिए वहां पर लिखा हुआ एटीएम केयर नंबर 6389390863 पर फोन किया। यह नंबर सादे कागज पर लिखा था। बात होने के कुछ देर बाद फोन कट गया, और फिर इस नंबर से फोन मुझे आया।
उन्होंने बताया मशीन खराब है, आप एटीएम कार्ड जहां डालते हैं वहां पर एक नीचे बटन है उसे दबाकर इंटर बटन दबाया और पिन डाले उसके पश्चात मैंने वैसा ही किया।
इसके बाद एटीएम कार्ड तेज आवाज कर के साथ बाहर आ गया। मुझे बताया गया मशीन खराब होने या ऐसी कंडीशन में एटीएम तो 24 घंटे के लिए ब्लॉक हो जाता है। इसके पश्चात में 24 तारीख सुबह तकरीबन 11:30 से 12:00 बजे बीमा कुंज एटीएम गया, जहां पर एटीएम यूज नहीं कर पाया।
इसी बीच मां का फोन आया कि मैंने पासबुक में एंट्री से उन्हें पता चला कि उनके अकाउंट से 10,000 एक बार और 4,900 दूसरी बार में पैसे निकले हैं। बैंक में एप्लिकेशन देने के बाद बैंक द्वारा बताया गया कि आप FIR करें आपके साथ फ्रॉड हुआ है।
अब जानिए क्या होती है कार्ड क्लोनिंग?
एटीएम बूथ में लगे एटीएम मशीनों से ही कार्ड क्लोनिंग होती है। इसके लिए साइबर अपराधी किसी एटीएम मशीन में माइक्रो कैमरे की तरह एक डिवाइस, जिसे स्कीमर कहते हैं, उसको छिपाकर लगा देते हैं।
चूंकि, हर डेबिट कार्ड में एक मैग्नेटिक स्ट्रिप होती है, जिसमें आपके खाते से जुड़ी सभी जानकारी सेव रहती है। जैसे ही एटीएम के कीपैड में कोई व्यक्ति अपने कार्ड को डालने के बाद उसका पिन एंटर करता है, तो ओवरले डिवाइसेज के जरिए कार्ड के पिन को स्कीमर रीड कर लेता है।
इनमें बैंक खाते से लेकर एटीएम कार्ड का पासवर्ड आदि तक शामिल है। इस जानकारी को हैकर अपने कंप्यूटर के इंटरनल मेमरी यूनिट में सेव करने के बाद उसको एक खाली कार्ड में डालकर आपके कार्ड का क्लोन यानी डूप्लीकेट कार्ड तैयार कर लेता है। इसकी मदद से वह किसी भी एटीएम में जाकर पैसे निकाल कर फरार हो जाता है।