शाहजहांनाबाद थाना पुलिस के मुताबिक चूना भट्टी में रहने वाले 55 वर्षीय उत्तम सिंह रघुवंशी किसानी करने के साथ अचल संपत्ति खरीदने-बेचने का भी काम करते हैं। वर्ष 2012 में उन्होंने भवन निर्माण का काम करने वाले मनीष वर्मा और युगल किशोर से कोलार स्थित अपनी लगभग पांच एकड़ जमीन पर कालोनी बनाने के लिए अनुबंध किया था। तब तय किया गया था कि कालोनी का विकास करने के बाद के भूखंड बिकने पर मुनाफे के तीन हिस्से कर लिए जाएंगे। मनीष और युगल ने कालोनी का विकास करने के बजाय जमीन उन्हें विक्रय करने की बात की। सहमत होते हुए उत्तम रघुवंशी ने परी बाजार स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय में 8.80 करोड़ रुपये में जमीन बेचने का अनुबंध कर लिया। इस अनुबंध में यह तय हुआ था कि आठ करोड़ देने पर जमीन की रजिस्ट्री करा दी जाएगी।
नोटिस मिलने पर लगी भनक
अनुबंध के आधार पर मनीष और युगल ने एक निजी फाइनेंस कंपनी से जमीन पर पांच करोड़ का ऋण स्वीकृत करा लिया। जमीन बंधक रखी होने के बाद भी उन्होंने डेढ़ करोड़ रुपये कीमत के दो भूखंड बेच भी दिए। समय पर ऋण की किस्त नहीं भरने पर जब फाइनेंस कंपनी का नोटिस पहुंचा, तब जमीन मालिक रघुवंशी को धोखाधड़ी का पता लगा। पहले उन्होंने ऋण का मसला सुलझाकर बंधक जमीन को मुक्त कराया। उसके बाद थाने में शिकायत दर्ज कराई।