‘रा.वन’ जैसी फिल्म बनाने की फिर इच्छा- अनुभव सिन्हा

Updated on 30-08-2024 05:42 PM

डायरेक्टर अनुभव सिन्हा वेब सीरीज 'आईसी 814 द कंधार हाइजैक' के जरिए ओटीटी पर डेब्यू कर रहे हैं। यह सीरीज 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट आईसी 814 के हाईजैक पर आधारित है। यह सीरीज नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो चुकी है। हाल ही में इस सीरीज को लेकर अनुभव सिन्हा, कुमुद मिश्रा, विजय वर्मा, पत्रलेखा और दीया मिर्जा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की।

इस दौरान सभी ने अपने-अपने एक्सपीरियंस शेयर किए। अनुभव सिन्हा ने बताया कि सीरीज में नसीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर और अरविन्द स्वामी को लेकर थोड़ा सा चिंतित थे। उन्होंने यह भी बताया कि वह ‘रा: वन’ जैसी वीएफएक्स वाली बड़ी फिल्म की प्लानिंग कर रहे हैं।

अनुभव जी, यह ऐसी घटना है जिसके बारे में सबको पता है, आप को कब लगा कि इस विषय पर सीरीज बनाना चाहिए?

मेरे पास इस विषय पर सीरीज बनाने का प्रस्ताव नेटफ्लिक्स की तरफ से आया था। इस प्रोजेक्ट पर राइटर त्रिशांत श्रीवास्तव, प्रोड्यूसर सरिता पाटिल, नेटफ्लिक्स इंडिया की वाइस प्रेसीडेंट मोनिका शेरगिल और बाकी क्रिएटिव टीम कुछ समय से काम कर रहे थे। एक पॉइंट पर इनको महसूस हुआ कि अब एक डायरेक्टर की आवश्यकता है। जुलाई 2021 में मुझे बुलाया गया। पहले स्क्रिप्ट कैप्टन के एक किताब पर आधारित थी। जिसमें सिर्फ एयरक्राफ्ट के अंदर की ही बातें थीं।

उसे पढ़ते वक्त ऐसा महसूस हो रहा था कि इसके पीछे क्या चल रहा है। प्लेन काठमांडो से हाईजैक होकर कंधार क्यों जा रहा है। वहां से इसका कनेक्शन क्या है? यह सब सवाल मेरे दिमाग में चल रहा था। मुझे ऐसा लग रहा था कि जब यह सब जानने की इच्छा मुझे हो रही है, तो आम जनता को भी होगा।

मैंने नेटफ्लिक्स की क्रिएटिव टीम से इसे और विस्तार से कहने की बात की। उन्होंने पूरी आजादी दे दी। बाकी लोगों की तरह मुझे भी ऐसा लगता था कि उस घटना के बारे में सब पता है। लेकिन जब उस घटना की गहराई में गया तो मुझे एहसास हुआ कि मुझे तो सिर्फ बेसिक बातें मालूम थीं।

रिसर्च के दौरान कभी आपको लगा कि अमृतसर में ही इस घटना को रोका जा सकता था?

देखिए, मुझे इस सीरीज के माध्यम से जो कहना था, वह कह दिया। अभी उसके बारे में इंटरव्यू में बात करूं तो वह बात अधूरी रह जाएगी। सीरीज में पूरा डिटेल है। यह बात तो हमें पता कि अमृतसर से प्लेन उढ़ गया। उसे वहां रोक देना चाहिए था। यह तो लोगों की आम धारणा है। लेकिन असल में क्या हुआ, उसे जब पूरे परिप्रेक्ष्य में नहीं देखेंगे तो समझ में नहीं आएगा।

विजय जी, जब आपको किरदार के बारे में बताया गया था, तो किरदार को लेकर सबसे पहली बात दिमाग में क्या आई थी?

सबसे पहली बात किरदार को लेकर नहीं आई थी। इस प्रोजेक्ट से जुड़ने का सबसे बड़ा कारण अनुभव सर हैं। इसने साथ काम करने की बहुत इच्छा थी। मैं इस प्रोजेक्ट से सीखने के लिए जुड़ा था। अराजकता और भय के बीच लोगों की जान बचाने का कप्तान का प्रयास वास्तव में प्रेरणादायक हैं। उन्होंने जो बहादुरी दिखाई थी, वह मुझे काफी इंस्पायरिंग लगा।

कुमुद जी, आपके अभिनय में जिस तरह की सहजता नजर आती है, उसका मूल मंत्र क्या है?

मैं डायरेक्टर, स्क्रिट और को- स्टार में विश्वास रखता हूं। बाकी चीजें अपने आप हो जाती हैं। बाकी अभिनय में सहजता का कोई मूल मंत्र नहीं है। सारी चीजें अपने आप ही सहज हो जाती हैं।

पत्रलेखा जी, आपने कंधार हाईजैक के बारे में सुना होगा। उस घटना के बाद कभी प्लेन में बैठने से डर लगा था?

तब तो मैं बहुत ही छोटी थी। इस सीरीज की शूटिंग के दौरान अनुभव सर ने ऐसा वातावरण बना दिया कि मुझे डर लग रहा था। प्लेन के अंदर शूटिंग करते वक्त मेरे लिए बहुत मुश्किल था। अनुभव सर माहौल को पूरी तरह से वास्तविक बना देते हैं।

दीया जी, आप अनुभव सिन्हा के कई प्रोजेक्ट में काम कर चुकी हैं। ‘भीड़’ की शूटिंग के दौरान ही डिसाइड हो गया होगा कि आप इसमें काम कर रही हैं?

नहीं, उस वक्त तो अनुभव जी को भी इस प्रोजेक्ट के बारे में नहीं पता था। मेरी खुशकिस्मती है कि उनके साथ मुझे काम करने का मौका मिलता है। मैं उनको बहुत सालों से जानती हूं। मैं खुश हूं कि इन्हें एयरक्राफ्ट के बाहर आने का मौका मिला, इसलिए मुझे इसमें काम करने का मौका मिला। वे हमेशा मेरे लिए खूबसूरत किरदार लेकर आते हैं। यह बार-बार नहीं होता है, लेकिन ऐसा किरदार जब किसी औरत के लिए लिखा जाता है तो बहुत अच्छा लगता है।

अनुभव जी, इस सीरीज की शूटिंग वास्तविक लोकेशन पर कितनी हुई और सेट लगाकर कितनी शूटिंग हुई है?

वास्तविक लोकेशन की बात करें तो कंधार तो नहीं गए थे। प्लेन का सेट तैयार किया था। दरअसल, यह नहीं बताना चाहिए। क्योंकि सीरीज का तिलिस्म बरकरार रहना चाहिए कि वो हमने कैसे किया। फिर भी अगर इसका जवाब ईमानदारी से देना चाहूं तो वास्तविक लोकेशन करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा है।

शूटिंग के दौरान सावधानियां कितनी बरतनी पड़ी?

मैं ज्यादातर दोस्तों के साथ शूटिंग करता हूं। अगर किसी के साथ पहली बार काम करता हूं तो मुलाकात के समय यह ध्यान देता हूं कि वो अपने काम को कितना जानता है। इतना ही इस बात का भी ध्यान देता हूं कि साथ काम करके मजा कितना आएगा। अगर सेट पर आनंद नहीं आएगा, सामने वाले के काम पर ट्रस्ट नहीं होगा तो अच्छा काम नहीं हो पाएगा।

नसीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर और अरविन्द स्वामी को लेकर थोड़ा सा चिंतित जरूर था कि इनके साथ कैसे सीन हो पाएगा। लेकिन शूटिंग से एक दिन पहले सबको सेट पर बातचीत के लिए बुलाया था कि देखे कैसे काम हो रहा है। वहां मैं थोड़ा सहज हो गया।

जो आर्टिस्ट इस सीरीज में नहीं काम कर रहे थे वो भी आते थे देखने कि काम कैसा हो रहा है। एक दिन तापसी पन्नू आईं चुपके से एक शूटिंग देखकर चली गईं किसी को पता ही नहीं चला। ऐसे कई लोग आते थे।



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