लैलूंगा की पहचान बना ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल

Updated on 04-04-2026 11:54 AM
रायपुर,  रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र का ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल आज अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण एक अलग पहचान स्थापित कर चुका है। पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली यह धान की किस्म अब किसानों के लिए आय का मजबूत माध्यम बन रही है। प्रशासन और कृषि विभाग के सहयोग से इस उत्पाद को व्यवस्थित रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे यह स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। किसानों द्वारा अपनाई जा रही जैविक पद्धति और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसानों का आय दुगुनी करने निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार किसानों को सशक्त बनाने में जनहितकारी नीति बनाने के साथ ही किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं इनमें कृषि उन्नति योजना, भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना जैसे योजना शामिल है। इससे प्रदेश के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं। 

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जंवाफूल धान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक सुगंध और स्वाद है, जो लैलूंगा क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु में ही पूर्ण रूप से विकसित हो पाती है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां-दिन में पर्याप्त गर्मी और रात में हल्की ठंडक, इस धान की गुणवत्ता को विशेष बनाती हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में उत्पादित चावल का स्वाद और खुशबू अलग पहचान रखता है और उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। 

‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल की मांग अब छत्तीसगढ़ से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। बेंगलुरु, चेन्नई, तेलंगाना, लद्दाख और कारगिल जैसे क्षेत्रों में इसकी अच्छी मांग है। वर्तमान में इसका बाजार मूल्य लगभग 150 रुपये प्रति किलो है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। वहीं बीज भी किसानों को 70 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अधिक किसान इस फसल की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

लैलूंगा के किसान चंद्रशेखर पटेल बताते हैं कि उनके परिवार में लंबे समय से जंवाफूल चावल की खेती की जा रही है, लेकिन अब इसकी मांग और पहचान में काफी वृद्धि हुई है। इस वर्ष उन्होंने 4 एकड़ में इसकी खेती की, जिसमें प्रति एकड़ लगभग 30,000 रुपए की लागत आई। वे बताते हैं कि उन्हें प्रति एकड़ 1 लाख रूपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। उनका कहना है कि इस फसल से उन्हें स्थिर और संतोषजनक आय मिल रही है, जिससे वे भविष्य में इसकी खेती का रकबा और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनके उत्पाद की मांग राज्य के बाहर भी बढ़ रही है, जिससे उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है। 

ग्राम खैरबहार के किसान भवानी पंडा बताते हैं कि वे वर्ष 2015 से खेती कर रहे हैं और धीरे-धीरे जंवाफूल चावल की खेती की ओर बढ़े हैं। वे पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती करते हैं, जिसमें रासायनिक खाद या कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। हरी खाद का उपयोग कर वे खेत की उर्वरता बनाए रखते हैं। भवानी पंडा बताते हैं कि जंवाफूल चावल की खेती से उन्हें पारंपरिक धान की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है। वर्तमान में वे 2 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं और आने वाले समय में इसे 20 एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखे हुए हैं। जंवाफूल चावल की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति से की जा रही है, जिससे इसकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहती है। रासायनिक मुक्त उत्पादन के कारण यह चावल स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को इसका बेहतर मूल्य मिल रहा है।    
प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा इस फसल को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही किसान समूहों और एफपीओ के माध्यम से उत्पादन और विपणन को संगठित किया जा रहा है। पिछले वर्ष लगभग 700 एकड़ में इसकी खेती की गई थी, वहीं इस वर्ष इसे बढ़ाकर 2000 एकड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी फसल से जुड़ सकें। 



अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 06 June 2026
राजनांदगांव। सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत जिले के प्रभारी सचिव  अविनाश चम्पावत आज डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बसंतपुर राजनांदगांव के स्कूल मैदान में जनसमस्या निवारण शिविर…
 06 June 2026
महासमुंद। नालसा एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के स्टेट प्लान आफ एक्शन के तहत विशेष राष्ट्रीय एवं अर्तराष्ट्रीय दिवसों  में आयोजित होने वाले कार्यक्रम अनुसार आज विश्व पर्यावरण…
 06 June 2026
दुर्ग। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव प्रथम बटालियन, वार्ड-60 दुर्ग में वृक्षारोपण किया। साथ ही अन्य अतिथियों ने भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का…
 06 June 2026
धमतरी। राज्य शासन की जनकल्याणकारी मंशा के अनुरूप आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु संचालित सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आज विकासखंड धमतरी की ग्राम पंचायत कोड़ेगांव (बी.)…
 06 June 2026
सूरजपुर। जिले में 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग (विशेष आवश्यकता वाले) बच्चों के चिन्हांकन एवं व्यापक सर्वेक्षण के उद्देश्य से समग्र शिक्षा सूरजपुर द्वारा कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में…
 06 June 2026
सूरजपुर। कृषि विभाग द्वारा संचालित खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनगरा में कृषक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणि पैकरा, सरपंच…
 06 June 2026
सूरजपुर। ग्रीष्म ऋतु में जल स्तर गिरने से उत्पन्न पेयजल कठिनाई को दूर करने हेतु लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा 03 जून को ग्राम धरसेंडी के कुदरीपारा क्षेत्र में 01…
 06 June 2026
सूरजपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सूरजपुर जिले के भटगांव नगर पंचायत स्थित पुष्प वाटिका में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आम…
 06 June 2026
सूरजपुर। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रही सरकार की प्राथमिकताओं का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई…
Advt.