मंदिर के पुजारी पंडित श्रीकांत शर्मा ने बताया कि पुष्टिमार्ग में प्रभु की सेवा में राग, भोग, शृंगार ही मुख्य है। 16 जून गंगा दशमी से प्रभु के सुखार्थ के लिए श्री यमुना जी के विविध मनोरथ प्रारंभ हो जाएंगे। मंदिर के आंगन में कुंड का निर्माण कर अलग-अलग मनोरथ किए जाएंगे। जैसे नौका विहार, यमुना पुलिन का मनोरथ, कमल सरोवर सावन-भादों का मनोरथ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 21 जून को प्रभु के भव्य नियम का आम्र मनोरथ होगा। उस दिन भी प्रभु को विभिन्न प्रजातियों के आमों का भोग लगाया जाएगा।