इसमें पंजीयन और राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा मदद की जाएगी। अब तक भोपाल, इंदौर, सागर, मुरैना, ग्वालियर सहित अन्य शहरों में संपत्तियों की जीआईएस मैपिंग की जा चुकी है जबकि शेष जिलों में अभी जारी है।
इस तरह काम करेगी जीआइएस लैब
सैटेलाइट के साथ-साथ रिमोट सेंसिंग एजेंसी से मैप डेटा और लाइव फीड लेंगे। इसके लिए एजेंसी से टाइअप होगा। यहां 15 एक्सपर्ट की टीम होगी। लैब शुरू होने पर रिमोट सेंसिंग एजेंसी जैसे ही डेटा देगी, उस आधार पर संबंधित नगर निगम को सूचना भेजकर कार्रवाई करवाई जाएगी। लैब द्वारा ली गई फोटो प्रत्येक 15 से 30 दिन में अपडेट होगी। इस दौरान यदि अवैध निर्माण होता दिखा, तो निगम की टीम मौके पर पहुंचेगी। इसके बाद भी यदि लापरवाही की गई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
अभी खाली प्लाट पर दिखते हैं निर्माण
भोपाल में वर्ष 2016-17 में प्राॅपर्टी टैक्स के लिए जीआइएस सर्वे शुरू हुआ था, जो अब भी आधा-अधूरा है। सर्वे के बाद मकानों व बिल्डिंगों का क्षेत्र बढ़ा हुआ दिखाई देता है और खाली भूखंड पर भी निर्माण नजर आते हैं। वर्ष 2016-17 के बाद से कई इमारतें बनी हैं, ऐसे में दोबारा से सर्वे किया जाना जरूरी है।
करवाई जा रही है मैपिंग
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रथम चरण में डेढ़ दर्जन नगर निगमों के भवनों की जीआइएस मैपिंग कराई गई है।
भोपाल,
इंदौर, मुरैना, सागर सहित कुछ जिलों में काम पूरा हो चुका है। इस लैब से यह पता चल सकेगा कि निर्माण अवैध या वैध हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई करने में आसानी होगी ।
इनका कहना है
जीआईएस लैब शुरू करने को लेकर प्रक्रिया जारी है। जिलों में मैपिंग का काम भी कराया जा रहा है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
- भरत यादव, आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग