
बोर्ड के माध्यम से वन विभाग काम कराएगा। प्रथम चरण के तहत कंसल्टेंसी एजेंसी की नियुक्ति के लिए बोर्ड ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। आगामी दिनों में निविदा जारी हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि ऐसा कई बार हुआ कि धार जिले के बाग क्षेत्र में डायनासोर के अंडे मिले हैं।
इसके बाद यह बात उठी कि यदि इस क्षेत्र की ठीक से ब्रांडिंग की जाए, तो यह वैश्विक पर्यटन आकर्षण का केंद्र बन सकता है। जितनी तेजी से यहां डायनासोर पार्क बनाने की बात चली, उतनी तेजी से ठंडी भी होती गई। कभी प्रशासन ने रुचि नहीं दिखाई, तो कभी शासन ने धार प्रशासन द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पहली बार इस पार्क को बनाने के लिए कुछ ठोस काम हुआ है।
कंसल्टेंट एजेंसी चयन के बाद डीपीआर यानी विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करेगी। इससे समूचे प्रोजेक्ट की लागत तय हो जाएगी। कार्य के लिए शासन से अनुमोदन लेकर आवंटन प्राप्त किया जाएगा। इसके बाद पार्क में विकास कार्य के लिए निविदा लगाई जाएगी। फिर कंसल्टेंसी एजेंसी की देखरेख में अन्य एजेंसियां कार्य करेंगी।
ईको पर्यटन बोर्ड की सीईओ समिता राजौरा के अनुसार बोर्ड की गाइड लाइन के हिसाब से पूरे प्रोजेक्ट पर कंसेप्ट प्लान के तहत काम होगा। इसके विकास के लिए विशेषज्ञ ग्लोबल एजेंसी तय की जाएगी। ग्राम पाडल्या के कंपार्टमेंट नंबर 17 और 19 में बोर्ड के माध्यम से कार्य होंगे।
वर्ष 2010 में राष्ट्रीय पार्क घोषित किया गया था दरअसल, वन ग्राम पाडल्या में डायनासोर अंडों के जीवाश्म और घोंसलों की साइट मिलने पर वर्ष 2010 में इसे राष्ट्रीय पार्क घोषित किया था।
इसके विकास की जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई थी। 14 वर्ष बीतने के बाद भी वन विभाग इसके विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य नहीं कर पाया। तमाम प्रयास के बाद वर्ष 2021 में वन विभाग ने मैनेजमेंट प्लान तैयार किया, लेकिन इस पर भी काम नहीं हो सका। अब पर्यटन बोर्ड ने कंपार्टमेंट नंबर 17 और 19 की 89 हेक्टेयर भूमि पर विश्व स्तरीय कार्य के लिए कंसेप्ट प्लान तैयार कर लिया है।
ओपन म्यूजियम में नर्मदा पथ की परिक्रमा बनाई जाएगी। टनल का निर्माण होगा। इसमें लाइट और साउंड शो के माध्यम से आदिकाल पर प्रस्तुति दी जाएगी। डायनासोर की रेप्लिका बनाई जाएगी। पार्क की बाउंड्रीवाल भी विशिष्ट डिजाइन की होगी। साथ ही भव्य मुख्य द्वार बनेगा।