
चर्चित वेब सीरीज 'पंचायत' के प्रधान यानी अभिनेता रघुवीर यादव शुक्रवार को भोपाल पहुंचे। उन्होंने वेबसीरीज, पर्सनल लाइफ और करियर से जुड़ी बातें बताई। कहा- पॉलिटिक्स में रूचि नहीं है। इसकी वजह है, मुझे उठापटक नहीं आती। मुझे सीधे-सीधे चलना पसंद है। बचपन से ही मैं इससे कतराता हूं, क्योंकि किसी को गिराकर आप खड़े हो जाएं यह जमीर गंवारा नहीं करता।
'पंचायत' के बारे में उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा ही सब कुछ पसंद है, जिसमें इंसानियत हो, जहां कोई विलन नहीं हो।
बता दें, रघुवीर यादव को मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी में मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है।
कहा- कमर्शियल लफ्ज से रहता हूं दूर
रघुवीर यादव ने बदलते दौर के सिनेमा में कमर्शिलाइजेशन के बारे में कहा कि मैं हमेशा से ही कमर्शियल लफ्ज से दूर भागता हूं। कमर्शियल कहकर यह जो लोग असलियत को नकलियत में बदल देते हैं, यह मुझे पसंद नहीं है, बस यहीं हमारा कल्चर वहीं खत्म हो जाता है।
सिनेमा में ओटीटी से बड़ा बदलाव आया
रघुवीर यादव ने कहा कि जो बदलाव सिनेमा में सबसे बड़ा बदलाव आया है वह है ओटीटी, यह हमारे कल्चर को बेहतर तरीके से सामने लाया है। ओटीटी हिंदुस्तान की सरलता सहजता, ईमान और सच्चाई को सामने लाया है। जो सिर्फ हिंदुस्तान में ही मिलती है। इसके लिए मैं हमेशा ओटीटी का शुक्रगुजार रहा हूं। क्योंकि यह बदलाव मेरे समय में आया है।
मानद उपाधि पर कहा पहले डर गया था
रघुवीर यादव को यूनिवर्सिटी द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी है। इस बार रघुवीर कहते हैं कि पहले तो मैं डर रहा था कि वहां से आने के बाद ऑपरेशन तो नहीं करना पड़ेगा फिर बाद में मुझे पता चला कि होता क्या है, फिर मुझे तसल्ली आई। यह मेरा सौभाग्य है कि यह सम्मान मुझे मिला है, मगर सम्मान को निभाने के लिए जो मशक्कत करनी पड़ती है मैं जानता हूं। हालांकि, मशक्कत में मुझे मजा आता है।
फेल होकर छोड़ा था घर, 20 साल बाद लौटा
रघुवीर बताते हैं कि एक बार स्कूल में जब एक बार स्कूल में फेल हुए थे तब उन्हें बहुत शर्मिंदगी हुई थी। इससे बचने के लिए उन्होंने घर छोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि मैं सोच रहा था कि घर में बाप को मुंह कैसे दिखाऊंगा। फिर मैं 20 साल बाद घर लौटा, जब मुझे इंटरनेशनल अवॉर्ड मिला।
हालांकि, मैं बीच में घर आया था। तब मुझे लक्ष्मी टॉकीज के पास पान की दुकान पर खड़े देख एक रिश्तेदार ने कहा था कि लौटकर आए गए, हमने तो सोचा था कि लक्ष्मी टॉकीज के पर्दे पर ही नजर आओगे। जो वहां अच्छा टॉकीज नहीं माना जाता था। उसे वहां खटमल टॉकीज कहते थे।
अभी तो सफर शुरू हुआ है
रघुवीर यादव ने कहा कि अभी मेरा सफर शुरू हुआ है, अभी ऐसा लगता है कि शुरुआत की है। अभी हमेशा काम कमी नजर आई है, मैं अपने काम में मैं सेटिसफेक्टशन ढूंढता हूं, मगर वह सेटिसफेक्टशन नहीं मिला है।
धीरे-धीरे अपने काम की कमियों को देखकर दूर कर रहा हूं। हमेशा कोशिश रहती है कि बेहतर करूं। हालांकि, यह सेटिसफेक्शन थिएटर में तो मिलता है, मगर अभी फिल्मों में नहीं मिलता।
यह थिएटर शो आएंगे जल्द
रघुवीर यादव ने कहा कि जल्द ही मेरे कुछ थिएटर शो मारे गए गुलफाम, सनम डूब गए और प्यानो जल्द ही करूंगा। हालांकि, प्यानो मैंने भोपाल में भी किया था। इसके अलावा दो वेब सीरीज और तीन फिल्में भी आएंगी। हालांकि इसका टाइटल अभी तय नहीं हुआ है, इन दिनों शूटिंग भी चल रही है।