भोपाल। कमला पार्क के पास स्थित है रहस्यमयी कमलापति महल। यहां बाद में बनी भोपाल की वीरांगना गोंड रानी कमलापति की आदमकद प्रतिमा जितनी प्रसिद्ध है, उतना ही उनका महल भी है। आज से लगभग 300 साल पहले रानी कमलापति महल का निर्माण हुआ था, जिसमें मुगलकालीन वास्तुकला देखने को मिलती है। खास बात यह है कि छोटे तालाब के किनारे बने इस महल की तीन मंजिलें अभी भी पानी में डूबी हुई हैं। यह महल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की भोपाल जिले में स्थित एकमात्र नान लिविंग साइट है। इसका निर्माण लखौरी ईंटों से किया गया है।
सैलानियों को लुभाता है महल
अगर आप इतिहास को जानने में रुचि रखते हैं और ऐसी जगहों की सैर पसंद करते हैं जहां कुछ नया जानने का मौका मिले, तो इस महल को जरूर देखना चाहिए। यह यकीनन आपकी ट्रिप को मजेदार बना देगा। कमलापति महल बहुत ही रहस्यमयी है। सात मंजिला इस महल की तीन मंजिलें पानी के अंदर डूबी हुई हैं। पहले पांच मंजिलें डूबी रहती थीं, लेकिन तालाब का जल स्तर कम होने की वजह से यह स्थिति बनी है। इस महल से जुड़ी कई रोचक कहानियां भी हैं।
300 साल पुराना है
रानी कमलापति महल का निर्माण लगभग 300 साल पहले हुआ था। इतिहास के जानकारों के मुताबिक निजाम शाह की पत्नी रानी कमलापति ने इस महल का निर्माण करवाया था। इसलिए इसका नाम कमलापति महल रखा गया था, लेकिन इसे भोजपाल का महल और जहाज महल के नाम से भी जाना जाता है। रात के वक्त इस महल की परछाई बिल्कुल जहाज जैसी लगती है।
लखौरी ईंटों से बना
इस महल को खास लखौरी ईंटों से बनाया गया था, जिसे लाहौर शहर से मंगवाया गया था। ये ईंटें बहुत मजबूत होती हैं, जिससे महल को मजबूत बनाया जा सके। महल के सामने की ओर छज्जे बनाए गए हैं। महल के निचले हिस्से को भारी पत्थरों के आधार पर बनाया गया था, जिससे महल कभी भी झील में ना धंस सके।
इसलिए डूबा था महल
इतिहास की जानकार पूजा सक्सेना बताती हैं कि राजा निजाम शाह का दोस्त मोहम्मद खान रानी कमलापति पर बुरी नजर रखता था और उन्हें अपनी रानी बनाना चाहता था। इसके चलते रानी के बेटे और मोहम्मद खान के बीच युद्ध हुआ। युद्ध में रानी के बेटे नवल शाह की मृत्यु हो गई। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही रानी ने महल की तरफ बांध का सकरा रास्ता खुलवा दिया, जिससे तालाब का पानी महल में समाने लगा। ऐसा रानी ने खुद को बचाने के लिए किया था। थोड़ी ही देर में पूरे महल में पानी भर गया और इमारतें डूबने लगीं। रानी कमलापति ने इसी पानी में समाधि ले ली। रानी ने जिस स्थान पर जल समाधि ली थी, वहां वर्तमान में रानी की आदमकद प्रतिमा स्थापित है। सन् 1989 में कमलापति महल को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एसआइ) को सौंप दिया गया था। बड़ी संख्या में सैलानी इसे देखने आते हैं।