’मिट्टी परीक्षण से बढ़ेगी फसल की पैदावार’ : ’संतुलित उर्वरक उपयोग से मिलेगा अधिक लाभ’

Updated on 28-05-2026 11:37 AM

कोरिया। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जिस प्रकार मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार फसलों के बेहतर विकास और अधिक उत्पादन के लिए संतुलित पोषक तत्वों की जरूरत होती है। पौधे ऑक्सीजन वायुमंडल और पानी से प्राप्त करते हैं, जबकि अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिट्टी से लेते हैं। इनमें नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश प्रमुख पोषक तत्व हैं, जिनकी कमी अधिकांश खेतों की मिट्टी में पाई जाती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को ही मिट्टी परीक्षण कहा जाता है। मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाओं में खेत की मिट्टी का वैज्ञानिक विश्लेषण कर फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों की अनुशंसा की जाती है। इससे किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग करने में सहायता मिलती है तथा अनावश्यक खर्च कम होता है।

’मिट्टी परीक्षण के बिना उर्वरकों का प्रयोग करना यानी डॉक्टर की सलाह बिना दवा लेने जैसे’ : 

भूमि परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने से पौधों में प्राकृतिक प्रकोप सहन करने की क्षमता बढ़ती है। साथ ही रोगों के प्रति प्रतिरोधकता में भी वृद्धि होती है। इससे मिट्टी के भौतिक, रासायनिक और जैविक गुण सुरक्षित रहते हैं तथा उत्पादन में स्थिरता बनी रहती है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि मिट्टी परीक्षण के बिना उर्वरकों का प्रयोग करना बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेने जैसा है।

’मिट्टी परीक्षण के प्रमुख उद्देश्य’ : 

मिट्टी की उर्वराशक्ति और पोषक तत्वों की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त करना। फसल विशेष के लिए खाद एवं उर्वरकों की सही मात्रा निर्धारित करना। समस्याग्रस्त मिट्टी की पहचान और उसके उपचार की जानकारी देना। दीर्घकालीन भूमि उपयोग द्वारा मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना।

’मिट्टी का नमूना लेने की सही विधि’ : 

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि खेत की मिट्टी का नमूना फसल कटाई के बाद या अगली फसल बोने से पहले लिया जाए। खेत के 8 से 10 अलग-अलग स्थानों से लगभग 15 सेंटीमीटर गहराई तक मिट्टी निकालकर उसे अच्छी तरह मिलाया जाए। इसके बाद लगभग 500 ग्राम मिट्टी का नमूना पॉलिथीन थैली में भरकर जांच के लिए मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जाए।

’नमूना लेते समय रखें सावधानियां’ : 

वर्षा या सिंचाई के तुरंत बाद नमूना न लें। गीली मिट्टी का उपयोग न करें। मेड़, नहर, पेड़ की छाया या खाद के गड्ढों के पास की मिट्टी का नमूना न लें।

खेत में अवशेष जलाने के तुरंत बाद नमूना लेने से बचें।

’मिट्टी परीक्षण से किसानों को मिलेगा आर्थिक लाभ’ : 

कृषि विभाग के अनुसार मिट्टी परीक्षण की लागत बहुत कम है, लेकिन इसके लाभ अत्यधिक हैं। सही मात्रा में उर्वरक उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है और प्रति इकाई अधिक उत्पादन प्राप्त होता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है।



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