दरअसल जिला उपभोक्ता आयोग में कोलार निवासी नागेंद्र सिंह परिहार ने एचडीएफसी बैंक के मुख्य प्रबंधक के खिलाफ याचिका 2021 में लगाई थी। इसमें उपभोक्ता ने शिकायत की थी कि उनका खाता इस बैंक में 10 वर्षों से है। बैंक ने बिना उपभोक्ता की सहमति के एफडीआर खोल दिया। इसके अलावा तीन से चार बार में उनके खाते से डिपाजिट चार्जेस के रूप में 3504 रुपये काट लिए गए।
आयोग ने बैंक को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए दो माह के अंदर नौ प्रतिशत ब्याज के साथ बैंक द्वारा ग्राहक के खाते से काटी गई राशि साढ़े तीन हजार रुपये के अलावा आठ हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया।
बैंक का तर्क, नियमों के तहत काटी राशि
उपभोक्ता नागेंद्र ने शिकायत की थी कि बैंक ने उन्हें विशिष्ट उपभोक्ता की श्रेणी में रखा था। इसमें वे कितनी भी नकद राशि जमा करना सकते हैं, जिस पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। अभी तक कोई भी राशि नहीं काटी गई, लेकिन 2021 में 1770 रुपये, 590 रुपये, 885 रुपये, 259 रुपये सहित कुल 3504 रुपये उनके खाते से काट लिए गए और एफडीआर भी खोल दी। उपभोक्ता द्वारा पूछने पर बैंक का कहना था कि आटोमेटिक एफडीआर बन जाती है। साथ ही नियमों के तहत खाते से राशि काटी गई है। आयोग ने बैंक के इस तर्क को खारिज कर दिया और हर्जाना लगाया।