
इसी सप्ताह शासन स्तर पर दोनों संशोधनों पर निर्णय होगा। दरअसल, अभ्यर्थियों से च्वाइस फिलिंग के दौरान सुरक्षा निधि इसलिए जमा कराई जाती है कि वे आवंटित सीट छोड़ें नहीं।
सीट छोड़ने पर उनकी सुरक्षा निधि राजसात कर ली जाती है। ऐसे में कई अभ्यर्थी इस डर में रहते थे कि च्वाइस फिलिंग के बाद मनपसंद सीट आवंटित नहीं हुई तो क्या करेंगे। अब शुरू के दो चरणों तक उन्हें इस तरह की शर्त से छूट देने की तैयारी है।
इसके पीछे शासन का तर्क यह है कि एमबीबीएस सीटों की मारामारी रहती है। सीटें खाली नहीं रह जाती हैं। उन्हें सरलता से मापअप चरण में भरा जा सकता है। इसके बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं तो उन्हें कालेज स्तर काउंसलिंग (सीएलएसी) में भरा जा सकेगा।
एमबीबीएस और बीडीएस में प्रवेश के लिए पंजीयन 25 जून से शुरू करने की तैयारी है। हालांकि, इस बार से केंद्र सरकार भी काउंसलिंग को लेकर देशभर के लिए एक तरह की व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है।