
आमतौर पर बांझपन की जांच जीवित लोगों पर होती है, लेकिन डॉ. विदुआ ने इसे वैज्ञानिक आधार देने के लिए एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने एम्स भोपाल में 57 मृत व्यक्तियों (शवों) के पोस्टमार्टम के दौरान उनके प्रजनन अंगों और शुक्राणुओं का गहन अध्ययन किया। इस शोध के लिए बकायदा परिजनों की सहमति और आईसीएमआर से मंजूरी ली गई थी। जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे।
अध्ययन में यह पाया गया कि जो लोग तंबाकू का सेवन करते थे, उनके वीर्य की गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी थी। तंबाकू के जहरीले तत्व प्रजनन अंगों के ऊतकों में घर कर जाते हैं और उनकी बनावट बदल देते हैं। नपुंसकता का खतरा रहता है। यानी तंबाकू के कारण शुक्राणुओं की संख्या कम हो जाती है और जो बचते हैं, वे इतने कमजोर होते हैं कि संतान उत्पत्ति में सक्षम नहीं रहते। पोस्टमार्टम के दौरान अंगों के भीतर ऐसे बदलाव देखे गए जो केवल तंबाकू के भारी सेवन के कारण हुए थे।
लखनऊ में आयोजित टॉक्सोकान-21 में देश के जाने-माने डॉक्टर वी.वी पिल्लै ने डॉ. विदुआ को इस शोध के लिए सम्मानित किया। डॉ. विदुआ ने बताया कि यह शोध डॉ. संगीता, लीना और डॉ. अश्वनी के सहयोग से पूरा हुआ। डॉ. विदुआ ने बताया कि तंबाकू का असर शरीर पर धीरे-धीरे होता है। यदि आप आने वाली पीढ़ी और खुशहाल परिवार चाहते हैं, तो तंबाकू से आज ही तौबा कर लें।