चीन की बड़ी तेल रिफाइनरी पर अमेरिका ने लगाया प्रतिबंध, ईरानी तेल खरीदने की सजा, 40 फर्मों पर भी शिकंजा

Updated on 25-04-2026 01:26 PM
वॉशिंगटन: ट्रंप प्रशासन ने चीन की एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि उसने अरबों डॉलर का ईरानी तेल खरीदा था। यह कदम वाइट हाउस के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद ईरान की आय के मुख्य स्रोत, यानी उसके तेल निर्यात को पूरी तरह बंद करना है। अमेरिका के वित्त विभाग ने कहा कि उसने हेंगली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी को निशाना बनाया और इसे कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए ईरान के सबसे ग्राहकों में से एक बताया।

40 शिपिंग फर्मों और जहाजों पर प्रतिबंध

इसके साथ ही विभाग ने लगभग 40 शिपिंग कंपनियों और जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाया है, जो ईरान के शैडो फ्लीट के रूप में काम काम करते हैं। शैडो फ्लीड उस बेड़े को कहा जाता है, जो किसी देश के लिए काम करते हैं, लेकिन उसका झंडा नहीं लगाते। ये शैडो फ्लीट प्रतिबंधों से बचकर निकलने के लिए चलाए जाते हैं। ये प्रतिबंध ऐसे समय में लगाए गए हैं, जब कुछ हफ्तों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग से चीन में मिलने वाले हैं।
अमेरिका ने हेंगली पेट्रोकेमिकल की डालियान बंदरगाह शहर में स्थित जिस रिफाइनरी को निशाना बनाया है, उसकी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता लगभग 400,000 बैरल प्रतिदिन है। यह क्षमता इसे चीन की सबसे बड़ी स्वतंत्र रिफाइनरियों में से एक बनाती है। अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा है कि हेंगली को साल 2023 से ईरानी कच्चे तेल की खेप मिल रही है।

अमेरिका ने दी थी प्रतिबंधों की धमकी

बेसेंट ने इस महीने की शुरुआत में ही चीन, हांगकांग, UAE और ओमान के वित्तीय संस्थानों को पत्र भेजा था। इसमें उन्होंने ईरान के साथ व्यापार करने पर द्वितीयक प्रतिबंधों की धमकी दी थी। बेसेंट ने 15 अप्रैल को बताया था कि प्रशासन ने देशों से कहा है कि अगर आप ईरानी तेल खरीद रहे हैं। अगर ईरानी पैसा आपके बैंकों में जमा है, तो हम अब सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने को तैयार हैं, जो बहुत ही सख्त कदम है।

ईरानी तेल का चीन सबसे बड़ा खरीदार

आंकड़ों से पता चलता है कि ईरान के निर्यात किए तेल का अधिकांश हिस्सा चीन ने खरीदा है। एनालिटिक्स फर्क Kpler के 2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि चीन ने ईरान के निर्यात किए गए तेल का 80% से ज्यादा हिस्सा खरीदा था। प्रतिबंधों के जानकारों का कहना है कि स्वतंत्र रिफाइनरियां अमेरिकी प्रतिबंधों के असर से कुछ हद तक सुरक्षित रहती हैं, क्योंकि अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से उनका जुड़ाव बहुत कम होता है। जानकार कहते हैं इन खरीद-बिक्री में मदद करने वाले चीन के बैंकों प्रतिबंध लगाना ईरानी तेल की खरीद पर ज्यादा बड़ा असर डालेगा।

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