
जानकारी के अनुसार शहर के ट्रैफिक चौराहों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों, रेलवे स्टेशन, बस स्टेंड एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे स्वयं या अपने परिवारों के साथ भिक्षावृत्ति में संलग्न देखे गए हैं।शहरी क्षेत्रों में बाल भिक्षावृत्ति में कई बार अन्य राज्यों,जिलों के बच्चे भी शामिल होते हैं। जिन्हे भिक्षावृत्ति के उद्देश्य के लिए तस्करी कर जबरदस्ती लाया जाता है। भिक्षावृत्ति के कार्य में संलग्न अधिकांश बच्चे नशे में संलिप्त भी होते हैं। यह भी देखा गया है कि भिक्षावृत्ति में लिप्त परिवारों के द्वारा नवजात शिशुओं एवं छोटे बच्चों के जरिए भी भीख मांगने, मांगवाने का कार्य किया जाता है। जो कि बच्चों के हित में नहीं होने के साथ-साथ उनके लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण और उनके विकास में बाधक भी है।इसकी रोकथाम के लिए राज्य शासन द्वारा "सड़क पर रहने वाले बच्चों के पुनर्वास के लिए नीति 2022" लागू की गई है। जिसके तहत भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों का चिह्नांकन कर, बच्चों तथा उनके परिवारों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रविधान किया गया है।
20 दिवसीय जागरूकता अभियान किया शुरू
भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए किशोर न्याय अधिनियम के उक्त प्रविधानाें के तहत, संचालानालय महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त निर्देशानुसार भोपाल जिले में 20 दिवसीय जागरूकता अभियान नौ जून तक जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों और अन्य विभागों के साथ मिलकर शुरू किया गया है।यह सभी दल 15 हाट स्पाट की सघन निगरानी करेंगे। भिक्षावृत्ति करते मिलने वाले बच्चे एवं बच्चों के परिजनों को उचित परामर्श दिया जाएगा। साथ ही विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए डाटाबेस तैयार किया जाएगा।