
गंभीर मरीजों को बड़े शहरों में उपचार के लिए एयर लिफ्ट कराने और आम आदमी को वायु सेवा का लाभ देने के लिए राज्य सरकार प्रदेश के हर ब्लाक में तीन हेलिपैड बनाएगी। इस निर्णय के बाद प्रदेश में कुल 939 हेलिपैड तैयार होंगे।
जिसमें से 208 हेलिपैड पहले से मौजूद हैं और ये सभी फंक्शनल पोजिशन में हैं। इसलिए 731 नए हेलिपैड बनाने का काम जल्द शुरू होगा जिसको लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय ने लोक निर्माण विभाग को हेलिपैड की जगह चिह्नित कर सूची देने के लिए कहा है। इन नए हेलिपैड के बनने पर 110 करोड़ रुपए का खर्च होगा।
प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में हेलिपैड बनाए की तैयारी की जा रही है। हर विकासखंड में कम से कम तीन हेलिपैड बनाने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसको लेकर लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को जिलों में अस्थायी हेलिपैड बनवाने के निर्देश दिए हैं ताकि सीएम यादव अपने कार्यक्रम के दौरान कम से कम समय में गांवों और ब्लाक मुख्यालयों में पहुंच सकें।
विमानन विभाग को भी सीएम के दौरे के मद्देनजर एलर्ट रहने के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने पीडब्ल्यूडी और विमानन विभाग से कहा है कि प्रदेश के सभी विकासखंडों में पक्के हेलिपैड बनाने के लिए कम से कम तीन स्थानों को चुना जाए और इसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को दी जाए। ये हेलिपैड ऐसे स्थान पर चिन्हित किए जाएं जहां से विकासखंड के अंतर्गत आने वाले दूरस्थ गांवों तक कम से कम समय में पहुंचा जा सके।
जहां हेलिपैड बने उनकी भी जानकारी दें
सीएम के प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह ने इसको लेकर पीएस पीडब्ल्यूडी को नोटशीट भेजी है। सीएम कार्यालय ने लोक निर्माण विभाग से यह भी कहा है कि जिन स्थानों पर हेलिपैड का चिह्नांकन किया जाए वहां पक्के हेलिपैड बने हैं या बनाए जा रहे हैं। इसकी सूची भी सीएम सचिवालय को विभाग की ओर से भेजी जाए।
प्रदेश में पहले से हैं 218 हेलिपैड
प्रदेश में अलग-अलग विकासखंडों में पहले से कुल 218 हेलिपैड बने हुए हैं। इसमें से 208 हेलिपैड फंक्शनल हैं जैसा कि सरकार ने पीडब्ल्यूडी को बनाने के लिए कहा है। वहीं दस हेलिपैड नान फंक्शनल हैं। इनमें से 87 का सरफेस पक्की डामर वाला है जबकि 131 हेलिपैड कांक्रीट के बने हुए हैं।
एक हेलिपैड पर कम से कम 15 लाख का खर्च
लोक निर्माण विभाग के अफसरों के अनुसार एक हेलिपैड बनाने में कम से कम 15 लाख रुपए का खर्च आएगा और यह 20 लाख रुपए तक भी हो सकता है। इसमें सबसे जरूरी यह है कि इसके लिए 270 मीटर फनल एरिया उपलब्ध हो और जमीन सरकारी हो। साथ ही डीजीसीए की गाइडलाइन के अनुरूप हो तभी हेलिपैड बन सकेंगे।
हेलिपैड बनने के फायदे
मुख्यमंत्री कार्यालय ने हेलिपैड बनाने के लिए जगह चिन्हित करने को कहा है लेकिन अभी इनके निर्माण का उद्देश्य साफ नहीं किया है पर माना जा रहा है कि इसके पीछे कई सुविधाओं को ध्यान में रखा जा रहा है।
1. सभी विकासखंड में हेलिपैड के निर्माण से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस उड़ान योजना का सपना भी पूरा हो सकेगा जिसमें गांव के आम आदमी अपनी सामर्थ्य के आधार पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर वायु सेवा के जरिये आ जा सकेंगे।
2. मरीजों को एयर लिफ्ट कर उपचार की सुविधा भी पीएम एयर एंबुलेंस स्कीम के जरिये दी जा सकती है।
3. हेलिपैड के माध्यम से लोकसभा चुनाव की आचार संहिता खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव योजनाओं की मैदानी रिपोर्ट लेने गांवों का भी दौरा कर सकते हैं।
एमपी में यहां हवाई अड्डे और हवाई पट्टियां
विमानन विभाग के अनुसार प्रदेश में इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, खजुराहो में एयरपोर्ट है। वहीं रीवा में प्रदेश का छठा एयरपोर्ट तैयार हो रहा है। इसके अलावा नीमच, रतलाम, खरगोन, खंडवा, शिवपुरी, गुना, टेकनपुर (ग्वालियर), सागर (ढाना), दमोह, सतना, सीधी, लालपुर (शहडोल), छिंदवाड़ा, नागदा, (दताना) उज्जैन, झाबुआ, बिरवा (बालाघाट), सकरिया (पन्ना), पचमढ़ी, उमरिया, सिवनी, मंडला, दतिया, मंदसौर, सिंगरौली में हवाई पट्टियां हैं। इसमें शहडोल, नागदा, टेकनपुर (ग्वालियर), दमोह की हवाई पट्टियां निजी जमीन पर बनाई गई हैं।