आर्कटिक में बारूद बोने पहुंचा अमेरिका, 3 देशों के साथ मिलकर बनाया गठबंधन, रूस की बादशाहत खत्म करने की तैयारी!

Updated on 04-08-2025 02:07 PM
वॉशिंगटन: दुनिया के हर हिस्से में जंग छेड़ने का ठेका मानो अमेरिका के पास है। मिडिल ईस्ट के कई देशों और अफगानिस्तान, ईरान को बर्बाद करने के बाद अब अमेरिका आर्कटिक में बारूद बोने की तैयारी कर रहा है। इसी मिशन के साथ अमेरिका, कनाडा और फिनलैंड के चार शिपयार्ड चुपचाप एक नए जहाज निर्माण गठबंधन में शामिल हो गए हैं, जिसका मकसद अगले तीन वर्षों के भीतर अमेरिकी तटरक्षक बल के लिए आर्कटिक सुरक्षा कटर (ASC) को तैयार करना है। इस प्रोग्राम के तहत बर्फीले समुद्र में चलने लायक लड़ाकू युद्धपोतों का निर्माण किया जाएगा। अमेरिका का मकसद अब तक शांत रहे आर्कटिक क्षेत्र में तनाव पैदा करना है। इसीलिए उसने कनाडा और फिनलैंड के साथ मिलकर आर्कटिक क्षेत्र से रूस के वर्चस्व को मिटाने की कोशिशों में जुट गया है।

अमेरिका की बोलिंगर शिपयार्ड, कनाडा की सीस्पैन शिपयार्ड्स और फिनलैंड की राउमा शिपयार्ड्स ने मिलकर आर्कटिक में चलने लायक जहाज बनाने का समझौता किया है। इस प्रोजेक्ट में हेलसिंकी स्थित फिनिश इंजीनियरिंग और डिजाइन कंपनी अकर आर्कटिक भी काम कर रही हैं। इनमें शामिल हर एक कंपनी के पास अलग अलग तजुर्बा है, जिसमें इंजीनियरिंग, ठंडे मौसम में डिजाइन विशेषज्ञता और ध्रुवीय वातावरण में ऑपरेशनल आवश्यकताओं की गहरी समझ है। यह गठबंधन आईसीई संधि के अंतर्गत बना है, जो अमेरिका, कनाडा और फिनलैंड के बीच आर्कटिक विकास और समुद्री तैयारी पर केंद्रित एक त्रिपक्षीय सहयोग समझौता है।
आर्कटिक में तैनाती के लिए युद्धपोत बना रहा अमेरिका?
आर्कटिक में जहाजों को ऑपरेट करना अत्यंत मुश्किल काम है। फिलहाल ध्रुवीय क्षेत्रों में अमेरिकी तटरक्षक बल की ऑपरेशनल क्षमता सिर्फ दो मुख्य जहाजों पर निर्भर है। एक है पोलर स्टार, जो एक भारी बर्फ तोड़ने वाला जहाज है और 1976 से सेवा में है। करीब 50 साल पुराना होने के बावजूद, यह अभी भी काम कर रहा है, लेकिन इसका रखरखाव अब बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी है। दूसरा जहाज हेली है, जो 1999 में शुरू हुआ था। लेकिन इन जहाजों की सीमित क्षमता और उम्र को देखते हुए अमेरिका को नए जहाज़ों की सख्त जरूरत है, खासकर ऐसे समय में जब रूस के पास दर्जनों आइसब्रेकर (कुछ न्यूक्लियर पावर्ड भी) हैं और चीन भी 'पोलर सिल्क रोड' के तहत आर्कटिक में पैर जमाने की कोशिश कर रहा है।
बोलिंगर शिपयार्ड्स के सीईओ बेन बोर्डेलॉन ने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ कागज पर लिखी योजना नहीं है। उन्होंने कहा, "हम निर्माण के लिए तैयार हैं। यह गति, निश्चितता और परिणाम देने के बारे में है। हम अनुमान नहीं लगा रहे हैं, लेकिन हम एक वास्तविक, निर्माण-तैयार समाधान पेश कर रहे हैं।" नये प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित जहाज 'सीस्पैन अकर मल्टी पर्पस आइसब्रेकर' नाम के डिजाइन पर आधारित होगा, जो 4 फीट मोटी बर्फ तोड़ने में सक्षम होगा। ये 12,000 नॉटिकल मील की दूरी तय कर सकेगा और 60 दिनों तक बिना रुकावट काम कर सकेगा। कंपनियों ने दावा किया है कि वे 33 महीनों के भीतर जहाज डिलीवर करने को तैयार हैं।
आर्कटिक में रूस और चीन से अमेरिका का मुकाबला
आपको बता दें कि आर्कटिक अब वह अछूता क्षेत्र नहीं रहा जो पहले था। पिघलती समुद्री बर्फ नए समुद्री मार्ग खोल रही है और इस क्षेत्र के संसाधनों को लेकर दुनियाभर के देशों की दिलचस्पी बढ़ गई है। अमेरिका के लिए, इसका मतलब सिर्फ वैज्ञानिक रिसर्च ही नहीं है, बल्कि उसने इसे अपने नेशनल सिक्योरिटी, आर्थिक मौके और जियो-पॉलिटिक्स के लिए अहम बना लिया है। आर्कटिक परिषद के तहत औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त आठ आर्कटिक राष्ट्र अमेरिका, कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और रूस हैं। इस क्षेत्र में उनके अधिकार संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) द्वारा परिभाषित हैं। हालांकि सीमाएं तय हो चुकी हैं, फिर भी भौतिक उपस्थिति का महत्व बना हुआ है। चीन, भले ही UNCLOS के तहत एक आर्कटिक राज्य नहीं है, लेकिन उसने 2014 में खुद को एक 'नजदीकी आर्कटिक राज्य' घोषित कर लिया और अपनी भागीदारी लगातार बढ़ानी शुरू कर दी है। इसीलिए अमेरिका अब इस क्षेत्र में अपनी शक्ति का विस्तार करना चाह रहा है।


अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 19 March 2026
तेहरान: अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग के बीच आज किसी चीज की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, तो वह है होर्मुज जलडमरूमध्य है। इसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait Of Hormuz)…
 19 March 2026
तेहरान/दोहा: इजरायल ने बुधवार को ईरान स्थित दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड पर हमला हमला किया है। साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले से बौखलाए ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के…
 19 March 2026
वॉशिंगटन: भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु संघर्ष का खतरा वास्तविक है और दोनों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के चलते यह बना हुआ है। अमेरिकी सीनेट में बुधवार को पेश ‘यूएस…
 19 March 2026
न्यूयॉर्क : अमेरिका में युद्ध कभी सिर्फ विदेश नीति नहीं होता, यह हमेशा घरेलू राजनीति में बदल जाता है। ईरान पर हमला करने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस की औपचारिक…
 19 March 2026
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी में भारी बढ़ोतरी की योजना पर विचार कर रहे हैं। इसमें हजारों अमेरिकी सैनिकों की तैनाती संभावित है। रॉयटर्स ने…
 19 March 2026
रियाद: सऊदी अरब ने कहा है कि ईरान की ओर से हो रहे हमलों का जवाब देने का उनकी सेना को हक है और वह इस तरफ बढ़ सकते हैं।…
 18 March 2026
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों की आवाजाही के लिए सुनिश्चित करने के लिए मिशन स्टार्ट कर दिया है। कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के तट…
 18 March 2026
तेहरान: ईरान के सबसे ताकतवर शख्स अली लारीजानी की इजरायल के हवाई हमले में मौत हो गई है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने मंगलवार को इसकी पुष्टि कर दी…
 18 March 2026
तेल अवीव: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक और वीडियो पोस्ट कर बताया है कि वह जिंदा हैं। नेतन्याहू का नया वीडियो ऐसे समय में आया है, जब इंटरनेट पर उनकी…
Advt.