भोपाल। शतरंज की बिसात में भले ही काले-सफेद खाने होते हों, लेकिन इस खेल के चाहने वालों की जिंदगी के कई रंग इन्हीं खानों से जुड़े होते हैं। ऐसा ही अनूठा किस्सा है, शहर के शतरंज खिलाड़ी निखलेश जैन और कोलंबिया की शीर्ष वरीय महिला इंटरनेशनल मास्टर एंजेला फ्रांकों का।
बार्सिलोना में हुई पहली मुलाकात
बार्सिलोना के चेस टूर्नामेंट में निखलेश की एंजेला से पहली बार मुलाकात हुई। खेल से शुरू हुई मुलाकात प्यार और फिर शादी तक जा पहुंची और एंजेला सात समंदर पार कर भारत आ गईं। आज यह खिलाड़ी जोड़ी भोपाल में रहकर प्रदेश और देश में शतरंज को बढ़ावा दे रही है। एक दूसरे को हराने के लिए दिमागी चालों वाले खेल के बीच उपजी यह प्रेम कहानी जितनी रोचक है, उतनी ही प्रेरक भी।
यूं शुरू हुआ सिलसिला
निखलेश जैन बताते हैं कि हम लोग 2017 में बार्सिलोना में हुए एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में मिले थे। तब मैं फ्रांस के एक खिलाड़ी के साथ अपना मुकाबला खेल रहा था। एंजेला मेरे बगल वाले बोर्ड पर स्पेन के खिलाड़ी से मुकाबला खेल रही थीं। एंजेला अपना मैच जीत गई थीं और मुकाबले के बाद मैच एनालिसिस कर रही थीं। इससे मुझे परेशानी हो रही थी। तब मैंने उन्हें चिल्लाकर बोला कि मेरा मैच चल रहा है, आप एनालिसिस बाद में करिए।
टूर्नामेंट के दौरान किया प्रपोज
फिर अगले दिन वो मुझसे सॉरी बोलने के लिए आईं। इसके बाद हमारी बातचीत शुरू हो गई। हम दोनों एक-दूसरे के परिवार से मिले। एक वर्ष बाद 2018 में विदेश में एक शतरंज ओलंपियाड हुआ, जिसमें मैंने उन्हें उनके मैच से पहले प्रपोज किया, जिससे टूर्नामेंट का पूरा माहौल ही अलग हो गया था। इसके बाद हम दोनों ने 2018 दिसंबर में कटनी में शादी की।
अंतरराष्ट्रीय यात्रा से होती थी परेशानी
निखलेश ने बताया कि शादी के बाद हमारा ज्यादातर समय अंतरराष्ट्रीय यात्रा में ही गुजरता था। मैं कटनी में रहता था तो आने-जाने में बहुत परेशानी होती थी। सोच ये भी थी कि प्रदेश में शतरंज को बढ़ावा भी देना है। एंजेला को भी भोपाल काफी अच्छा लगता था, इसलिए 2019 में भोपाल आकर रहने लगा। मैंने दानिश कुंज में घर खरीद लिया।
एक-दूसरे को करते हैं सपोर्ट
निखलेश ने बताया कि आज भोपाल में मुझे साढ़े चार वर्ष हो गए हैं। हमारा बेटा भी भोपाल में ही पैदा हुआ और वह साढ़े तीन वर्ष का हो गया है। हम दोनों अपने-अपने देशों से बहुत प्रेम करते हैं। दोनों में एक दिलचस्प बात यह है कि जब भी भारत के खिलाड़ी शतरंज खेलते हैं तो एंजेला उनको सपोर्ट करती हैं और जब कोलंबिया फुटबॉल खेलता है तो मैं सपोर्ट करता हूं।
भोपाल में शुरू की खेलो चेस इंडिया मुहिम
इस जोड़ी ने भोपाल में आकर खेलो चेस इंडिया मुहिम शुरू की। पिछले डेढ़ वर्ष में 36 टूर्नामेंट किए हैं, जिसमें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट शामिल हैं। शहर के स्कूलों में जाकर शतरंज की शिक्षा देते हैं। इनकी कोशिश यही है कि भोपाल से भी अच्छे शतरंज खिलाड़ी निकलें। एंजेला अभी भी अपने देश के लिए खेलती हैं। वह भारत की ओसीआई कार्ड होल्डर हैं। विदेशी भारतीय नागरिक के तौर पर यहां रहती हैं। उन्हें वोट का अधिकार नहीं है, न ही यहां जॉब कर सकती हैं। वह अधिकृत तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। बता दें कि निखलेश चेसबेस इंडिया हिंदी के प्रमुख हैं और खेलो चेस इंडिया के निदेशक भी हैं।