
बता दें कि कोरोना के चलते भेल को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। वर्ष 2020-21 में भेल ने 2234 करोड़ रुपये का उत्पादन किया था। घाटा होने पर भेल प्रबंधन ने कर्मचारियों के खर्चों जैसे कैंटीन की सुविधा, रिवार्ड स्कीम, दीपावली बोनस, प्लांट परफार्मेंस बोनस में कटौती तक कर दी थी, लेकिन एक वर्ष पहले भेल को वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण करने का काम मिला। तब से भेल के अच्छे दिन लौटने लगे। अब भेल धीरे-धीरे अपने पुराने रंग में लौट रहा है। भेल के पास आर्डर की कमी दूर हो रही है।
ट्रांसफार्मर, ट्रैक्शन मोटर, हाइड्रो सहित भेल भोपाल यूनिट के सभी नौ ब्लाक में आत्मनिर्भर व मेक इन इंडिया को ध्यान में रखते हुए परिवहन, सैन्य और उद्योग क्षेत्रों के आवश्यक भारी उपकरण बनाए जा रहे हैं। कोरोना से पहले बीते वर्षों में सिर्फ भेल की भोपाल यूनिट का ही 6000 करोड़ रुपये तक उत्पादन लक्ष्य हासिल करने का इतिहास रहा है।
भेल को रेलवे की ओर से 23 हजार करोड़ रुपये का वंदे भारत ट्रेन सेटों की आपूर्ति का मिला है। यह भेल को घाटे से उबारने के लिए एक संजीवन बूटी मानी जा रही है। भेल टीडब्ल्यूएल कंसोर्टियम द्वारा 80 वंदे भारत ट्रेनों का निर्माण, परीक्षण, चालूकरण का कार्य भारतीय रेलवे के आइसीएफ चेन्नई में किया जाएगा। ये ट्रेन 160 से 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी।
भेल भोपाल, झांसी, बेंगलुरु यूनिटों में इस ट्रेन के लिए आइजीबीटी आधारित ट्रैक्शन कन्वर्टर, इन्वर्टर, ट्रेन कंट्रोल प्रबंधन प्रणाली मोटर, ट्रांसफार्मर और बोगी का निर्माण चल रहा है। भोपाल यूनिट ने वंदे भारत ट्रेन के लिए चार पोल तीन फेज इंडक्शन मोटर वाले इस ट्रैक्शन मोटर का सफलतापूर्वक परीक्षण कर विकास कर लिया है।
यह मोटर हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनों के लिए उपयुक्त है। 16 कोच के ट्रेन में आठ कोच में ये मोटर लगाए जाएंगे, जिससे ट्रेन तत्काल गति पकड़ सके और इसे सुरक्षित रूप से हाईस्पीड पर चलाया जा सके। इस तरह भेल भोपाल यूनिट में करीब 2560 मोटरों का निर्माण किया जाना है।
वर्ष-2020-21 : 2234 करोड़ रुपये
वर्ष-2021-22 : 2779 करोड़
वर्ष-2022-23 : 2968 करोड़
वर्ष-2023-24 : 3403 करोड़
वर्ष-2024-25 : 4275 करोड़ रुपये उत्पादन का लक्ष्य
वर्ष-2020-21 : 3474 करोड़ रुपये
वर्ष-2021-22 : 2250 करोड़
वर्ष-2022-23 : 3320 करोड़
वर्ष-2023-24 : 6213 करोड़
- विनोदानंद झा, भेल प्रवक्ता भोपाल