
भोपाल का एक परिवार सीहोर जिले के अमरगढ़ वाटर फॉल में फंस गया। परिवार के 5 सदस्य रविवार को पिकनिक मनाने यहां पहुंचे थे। शाम करीब 6 बजे घर लौटते समय अचानक नदी में पानी बढ़ गया।
मौके पर पहुंची एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीम ने रात करीब 10 बजे सभी का रेस्क्यू कर लिया। परिवार को निकालने के लिए दोनों ओर ट्रैक्टर से रस्सी बांधी गई। फिर रस्सी के सहारे सभी को बाहर निकाला गया।
सीहोर पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने बताया कि पांचों का रेस्क्यू कर लिया गया है। इनमें अशोक माहेश्वरी (61), निशा माहेश्वरी (58), शुभम (32), सुरुचि (30) और यश (28) शामिल हैं। ये सभी भोपाल के लालघाटी स्थित सनसिटी कॉलाेनी के रहने वाले हैं।
वहीं, रेंजर महिपाल सिंह ने बताया- जहां ये लोग फंसे थे, वह टापू था। दोनों तरफ पानी था। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चलाया।
मोबाइल डिस्चार्ज होता तो बढ़ जाती मुश्किलें
वाटर फॉल में फंसे बुजुर्ग अशोक माहेश्वरी ने बताया कि जब हम फंसे थे तब हमने एनडीआरएफ टीम से संपर्क किया। लेकिन, मोबाइल की बैटरी खत्म होने वाली थी। अगर मोबाइल डिस्चार्ज हो गया होता तो मुश्किलें बढ़ जाती। अभी हम सभी सुरक्षित हैं।
पिछले साल डूबे थे दो युवक
पिछले साल 15 जुलाई को अमरगढ़ वाटर फॉल में भोपाल का एक युवक डूब गया था। भोपाल से आकाश जायसवाल, अंकित जायसवाल, हर्ष राय, आदित्य भदौरिया, सीमा सुमन, डोमनिक टोपो कार से पिकनिक मनाने के लिए अमरगढ़ झरने पर गए थे। तभी नहाते वक्त भोपाल की मिनाल रेसीडेंसी निवासी आकाश (28) झरने के तेज बहाव में आ गया और डूब गया था। अगले दिन उसकी लाश मिली थी।
पिछले साल ही (मालाखेड़ी) नर्मदापुरम निवासी शिवकांत पिता बलराम यादव (29) अपने दोस्तों के साथ शाहगंज के करीब जंगल में अमरगढ़ वाटर फॉल पर पिकनिक मनाने गया था, तभी झरने के करीब पत्थर पर पांव फिसलने से वह झरने में डूब गया। जब वह काफी देर तक झरने से बाहर नहीं निकला तो साथियों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर गोताखोरों की मदद से युवक की तलाश की। तीसरे दिन उसका शव मिला
भोपाल से 65 किलोमीटर दूर है झरना
अमरगढ़ का झरना भोपाल से करीब 65 किलोमीटर दूर है। शाहगंज के पास गांव से झरने तक करीब 6 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद ही लोग वहां तक पहुंचते हैं। बारिश के दिनों में डेढ़ सौ फीट ऊंचाई से पानी गिरता है। इसलिए लोग यहां जाने के लिए आकर्षित होते हैं। हालांकि, हर साल हादसे का शिकार भी होते हैं। पिछले कुछ सालों में डूबने से कई लोगों की मौत भी हो चुकी हैं। हर साल लोगों को रेस्क्यू करने की नौबत बनती है।