चीनी 'साल्ट टाइफून' का अमेरिका पर बड़ा साइबर अटैक, निशाने पर ट्रंप और कमला हैरिस, जानें क्या है पूरा मामला

Updated on 28-10-2024 01:37 PM
वॉशिंगटन: चीनी हैकर्स के एक ग्रुप ने कथित तौर पर अमेरिका में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों से जुड़े डेटा में सेंध लगाई है। इस ग्रुप ने डोनाल्ड ट्रंप, कमला हैरिस और जेडी वेंस की कम्युनिकेशन डिवाइस को निशाना बनाया है। इस हैकिंग की कोशिश करने वाले चीनी साइबर जासूसी ग्रुप को 'साल्ट टाइफून' नाम दिया गया है। इसने कितनी जानकारी चोरी की है, ये अभी तय नहीं है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, साल्ट टाइफून ने दूरसंचार नेटवर्क में घुसपैठ की है और वेरिजोन सहित प्रमुख सेवा प्रदाताओं के महत्वपूर्ण डेटा तक पहुंचने की कोशिश की है। अमेरिका में साल्ट टाइफून के निशाने पर डोनाल्ड ट्रंप के कैंपेन के साथ-साथ डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस और उनके साथी टिम वाल्ज भी शामिल हैं।

क्या है ये साल्ट टाइफून?


रिपोर्ट के मुताबिक, वेरिजोन के बुनियादी ढांचे पर इस साइबर हमले को चीन के खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के बड़े अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि यह साफ नहीं कि हैकर्स को संवेदनशील जानकारी जुटाने में कितनी कामयाबी मिली है। अमेरिकी संघीय एजेंसियां ये जानने की कोशिश कर रही हैं कि कितना नुकसान हुआ है।

साल्ट टाइफून, चीनी हैकरों के ग्रुप को माइक्रोसॉफ्ट की साइबर सुरक्षा टीम की ओर से दिया गया नाम है। माइक्रोसॉफ्ट चीनी हैकर समूहों को 'टाइफून' कहता है। माइक्रोसॉफ्ट ईरानी हैकर्स के लिए 'सैंडस्टोर्म' और रूस के लिए 'ब्लिजार्ड' शब्द उपयोग करता है। चीनी हैकर्स के लिए टाइफून में साल्ट जोड़ने का मकसद कॉर्पोरेट डेटा चोरी या वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े पारंपरिक साइबर अपराध के बजाय काउंटरइंटेलीजेंस को दिखाना है।

राजनेताओं को क्यों बनाया निशाना


रिपोर्ट कहती है कि साल्ट टाइफून के ऑपरेशनों का उद्देश्य चुनाव के समय महत्वपूर्ण अमेरिकी संपत्तियों और संस्थानों की खुफिया जानकारी एकत्र करना है। इसीलिए साल्ट टाइफून ने शीर्ष राजनीतिक हस्तियों और उनके कर्मचारियों के साथ-साथ गहरे सरकारी संबंधों वाले व्यक्तियों से जुड़े फोन नंबरों को टागरेट किया।

एफबीआई और साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी ने खतरे की गंभीरता को स्वीकार करते हुए अपने बयान में कहा कि साइबर सुरक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ सहयोगात्मक प्रयास चल रहे हैं। एजेंसी की चिंता यह है कि साल्ट टाइफून ने महत्वपूर्ण मेटाडेटा प्राप्त किया हो सकता है, जो खुफिया संदर्भ में वास्तविक सामग्री के समान ही खुलासा कर सकता है।

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