डेंटल विंग के लिए 55 तरह की आधुनिक मशीनें और उपकरण मंगाए जाएंगे। आपरेशन थिएटर और वार्ड भी अलग होगा। यूनिट बनने के बाद यहां आने वाले मरीजों को दातों से जुड़ी किसी भी तरह की सर्जरी के लिए बड़े सेंटर रेफर करने की जरूरत नहीं होगी। नए दांत लगाने, ओरल सर्जरी, ओरल मेक्सिलोफेशियल सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रिया भी हो सकेगी।
लगभग छह करोड़ से अधिक का होगा बजट
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इस डेंटल विंग को बनाने के लिए छह करोड़ से अधिक का बजट तय किया गया है। वर्तमान में मरीजों को महिला और पुरुष सर्जिकल वार्ड में भी भर्ती करना पड़ता है। इसके बनने के बाद महिला और पुरुषों के लिए अलग से वार्ड भी बनाए जाएंगे। यहां से मरीजों को रेफर नहीं किया जा सकेगा।
इस श्रेणी के इलाज भी हो सकेंगे
नए डेंटल विंग में दाढ़ की सर्जरी, पायरिया, जबड़ा फ्रैक्चर, छोटे बच्चों के दांतों का इलाज, बच्चों के दांतों की नसों में होने वाली परेशानी, पक्के दांत आने तक दांत की जगह सुरक्षित रखना, दांतों की कैविटी में पर्मानेंट फिलिंग आदि का इलाज संभव हो सकेगा। यहां वर्तमान में मरीजों को बमुश्किल रूट कैनाल, फिलिंग और दांत निकालने जैसी सुविधाएं ही मिल पाती हैं। कई बार इसके लिए भी मरीजों को दो से तीन हफ्ते तक इंतजार करना पड़ता है। अभी यहां रोज 90 से 100 की ओपीडी होती है। ओरल सर्जरी समेत अन्य गंभीर प्रोसीजर के लिए रोज दो से तीन मरीजों को बड़े सेंटर में रेफर करना पड़ता है।
इन मशीनों से इलाज
नई विंग में आरवीजी, एक्स-रे, सेंसर, एपेक्स लोकेटर, एंडो मोटर, अल्ट्रासोनिक क्लीनर, स्केलर, ओपीजी एक्सरे मशीन, डायोड लेजर, फिजियो डिस्पेंसर, इलेक्ट्रोकाटरी मशीन, पीजोइलेक्ट्रिक समेत छोटे-बड़े 55 मशीन और उपकरण होंगे। अभी कई डेंटल प्रक्रिया अस्पताल के ही ओटी या फिर डेंटल टेबल पर किए जाते हैं।
दांतों के मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पताल परिसर में नई डेंटल विंग को मंजूरी मिली है। एनएचएम द्वारा डेंटल विंग के लिए नक्शा फाइनल हो गया है। यहां मरीजों को दस बेड की सुविधा होगी। वैसे स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल की हर यूनिट को बेहतर किया जाएगा। इसके लिए यह पहला कदम है। दो महीने में यह विंग बनकर तैयार हो जाएगा।
- डा. राकेश श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल