रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए मांगी अनुमति
पिछली सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता भोपाल निवासी नितिन सक्सेना की तरफ से बताया गया कि भोपाल में कुछ रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए 244 पेड़ काटने की मांग की गई है। शिफ्टिंग की आड़ में पेड़ों को काटने का एक नया तरीका अपनाया गया है। खबर में अधिकारियों के हवाले से कहा है कि पेड़ों को काटने की परमिशन लेना मुश्किल है और इसलिए पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने का एक प्रपोजल है । जिसके लिए किसी परमिशन की जरूरत नहीं है।प्रदेश में कोई ट्री प्लांटेशन पॉलिसी लागू नहीं
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया था कि राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में बताया है कि प्रदेश में कोई ट्री प्लांटेशन पॉलिसी लागू नहीं है। फोटोग्राफ से पता चलता है कि ट्रांसप्लांटेशन का तरीका पेड़ की सभी टहनियों और पत्तियों को पूरी तरह से हटाना और पेड़ के तने को दूसरी जगह लगाना था। विधानसभा बिल्डिंग कंट्रोलर के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर द्वारा विधानसभा सेक्रेटेरिएट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को 30 अक्टूबर 2025 को एक पत्र लिखा गया था। जिसमें बताया गया था कि रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स के कंस्ट्रक्शन के कारण रास्ते में आ रहे कई पेड़ को हटाना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में टहनियों को काटा जा रहा है और भारी मात्रा में लकड़ी इकट्ठा की जा रही है।पत्र में इन टहनियों और लकड़ी का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया गया है। जिससे स्पस्ष्ट है कि किसी पेड़ को बचाने या ट्रांसप्लांट करने की कोशिश नहीं कर रहे है । प्रोसेस में 244 पेड़ काटने की कोशिश की जा रही है। रेलवे के किसी प्रोजेक्ट के लिए 8000 पेड़ काटे गए हैं। इसके अलावा दायर एक अन्य याचिका में कहा गया था कि सागर के कलेक्टर कार्यालय के विस्तार के लिए बिना अनुमति पेड़ों को काटा गया है। इसके अलावा राष्ट्रीय राज्य मार्ग के निर्माण के लिए अवैध रूप से पेड़ों को काटा गया है। इसके अलावा सागर कलेक्टर कार्यालय के लिए बिना अनुमति पेड काटने तथा राष्ट्रीय राज्यमार्ग के लिए अवैध रूप से पेड़ों की कटाई करने किए जाने के संबंध में भी याचिका दायर की गयी थी।
युगलपीठ के द्वारा दोनों याचिका की सुनवाई बुधवार को भोपाल, सागर सहित अन्य स्थानों में पेड़ काटे में याचिका की संयुक्त करते हुए उक्त तल्ख टिप्पणी की। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के आदेश पर लिए अजय श्रीवास्तव एग्जीक्यूटिव इंजीनियर पीडब्ल्यूडी, अंडर सेक्रेटरी, विधानसभा सेक्रेटेरिएट, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर-कम-अंडर सेक्रेटरी, विधानसभा सेक्रेटेरिएट, कमिश्नर म्युनिसिपल कारपोरेशन, भोपाल, प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, विधानसभा सेक्रेटेरिएट तथा जनरल मैनेजर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। वेस्ट सेंट्रल रेलवे की महाप्रबंधक के स्थान पर डीआरएम भोपाल उपस्थित हुए। याचिका पर अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की गई है।



