
प्रदेश की सभी पार्किंग अब फास्टैग से जुड़ेंगी। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नई पार्किंग पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। 6 अलग-अलग श्रेणियों में बंटी इस पॉलिसी को जल्द लागू कर दिया जाएगा। नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की सलाह के बाद अब पार्किंग शुल्क फास्टैग से कट जाएगा। इससे पार्किंग व्यवस्था कैशलेस हो जाएगी। साथ ही अवैध वसूली या विवाद से भी निजात मिलेगी।
इस पॉलिसी में प्रदेश में हर पार्किंग के 20% हिस्से में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने को भी कहा गया है। बता दें कि इससे पहले अक्टूबर 2016 में भी नगरीय आवास एवं विकास विभाग ने प्रदेश के लिए पार्किंग पॉलिसी तैयार की थी। इसमें पीक ऑवर में अधिक शुल्क रखा गया था। यह लागू नहीं हो सकी।
मल्टीलेवल पार्किंग के 500 मीटर में नो पार्किंग जोन… मल्टीलेवल पार्किंग के 500 मीटर दायरे में नो पार्किंग जोन घोषित रहेगा। हर पार्किंग में ई-पार्किंग मैनेजमेंट जैसे मोबाइल एप्लीकेशन, क्रेडिट-डेबिट कार्ड के जरिए पार्किंग शुल्क के बंदोबस्त भी करने होंगे।
जनसंख्या के हिसाब से पार्किंग शुल्क
नई नीति में नगरीय निकायों की जनसंख्या के आधार पर पार्किंग दरें अलग-अलग हो सकती हैं। नगरीय निकाय की सीमा में सार्वजनिक पार्किंग क्षेत्रों के संचालन और मेंटेनेंस के लिए निकाय से लाइसेंस लेना होगा।
यदि निकाय की जनसंख्या 5 लाख या इससे ज्यादा है तो लाइसेंस अवधि 5 साल से ज्यादा नहीं होगी। 5 लाख से कम जनसंख्या वाले निकाय में लाइसेंस अवधि 3 साल की ही होगी। कोई कंपनी या संस्था पार्किंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 50 लाख रुपए से ज्यादा निवेश करती है तो उसे 5 साल से ज्यादा समय के लिए लाइसेंस दिया जा सकेगा।
निजी पार्किंग भी बना सकेंगे
इस पॉलिसी में निजी पार्किंग क्षेत्रों के लिए भी परमिट दिए जाने का प्रावधान है। यानी कोई भी व्यक्ति या संस्था अपनी निजी भूमि पर पार्किंग क्षेत्र डेवलप कर सकेगा। इसके लिए संबंधित नगरीय निकाय से परमिट लेना होगा।
मप्र को-ऑपरेटिव सोसायटीज एक्ट-1960 के तहत निकाय की कुल पार्किंग में से 25% शिक्षित बेरोजगारों की सहकारी समिति के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है।
इनके लिए फ्री रहेगी पार्किंग… एंबुलेंस, दिव्यांग व्यक्ति के वाहन, सरकारी वाहन जैसे फायर ब्रिगेड-वाटर टैंकर, ईवी और शासन द्वारा अधिसूचित वाहन।