
प्रदेश के सभी नगरीय निकायोंं में बने सरकारी और निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की जांच होगी। भीषण गर्मी के दौर में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए नगरीय विकास और आवास विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों और नगरीय निकाय प्रमुखों से कहा है कि अस्पताल और नर्सिंग होम्स की फायर सेफ्टी की जांच कराकर रिपोर्ट दी जाए। इसको लेकर पिछले माह स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने नगरीय विकास को पत्र लिखा था, और गर्मी में होने वाली आगजनी की घटनाओं के मद्देनजर फायर सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट लेने के लिए कहा था।
कमिश्नर नगरीय विकास द्वारा जारी निर्देश में कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र, नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद में संचालित अस्पताल और नर्सिंग होम्स की जांच 15 दिन में कराकर रिपोर्ट भेजें और इनमें चुनाव आचार संहिता के प्रावधानों का भी ध्यान रखें। अगर कहीं फायर सेफ्टी मापदंडों का पालन नहीं हो रहा है तो वहां नियमानुसार कार्यवाही की जाए और फायर सेफ्टी के इंतजाम कराए जाएं। सूत्रों के अनुसार नियमों का पालन न होने पर पंजीयन निरस्त करने संबंधी प्रस्ताव भी मांगे गए हैं।
इन सुरक्षा मानकों कराएंगे जांच दल
जबलपुर में अस्पताल में आग लगने से हुई थी 8 मौतें
स्वास्थ्य विभाग ने गर्मी के कारण अस्पतालों की फायर ऑडिट कराने के निर्देश इसलिए भी दिए हैं क्योंकि साल भर पहले जबलपुर में एक निजी अस्पताल में आग लगने से आठ मरीजों और अटैंडरों की मौत हो गई थी। इस मामले में तब यह खुलासा हुआ था कि आग लगने की स्थिति में अस्पताल में बचाव के लिए फायर उपकरण काम नहीं कर रहे थे और आपात स्थिति में सुरक्षित निकलने के इंतजाम भी नहीं थे।