
उल्लेखनीय है कि मेडिकल और आयुष कॉलेजों की मान्यता भी इनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर बने आयोग देते हैं, लेकिन नर्सिंग कॉलेजों के लिए अभी तक ऐसी व्यवस्था नहीं है। नर्सिंग कॉलेजों को राज्यों की काउंसिल ही मान्यता दे रही है। बता दें वर्ष 2018 के पहले तक आईएनसी के मापदंडों के आधार पर मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल कॉलेजों को मान्यता दे रही थी। इसके बाद राज्य सरकार ने अपने नियम बनाकर मापदंड निर्धारित किए थे , इसके आधार पर मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल मान्यता दे रही थी।
मापदंडों की अनदेखी कर कॉलेजों को मान्यता देने का खुला खेल वर्ष 2018 के बाद से ही शुरू हुआ है। हाई कोर्ट द्वारा पिछले सप्ताह दिए निर्देश के बाद इस सत्र (वर्ष 2024-25) की मान्यता भी दी जानी है, लेकिन वर्तमान सत्र में आईएनसी के मापदंडों के आधार पर मान्यता देने का काम मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ही करेगी।
काउंसिल के प्रशासक अभिषेक दुबे ने बताया कि प्रदेश में आयोग बनाने के लिए सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग ने सहमति दे दी है। फाइल अब विधि विभाग में है। इसके बाद प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में जाएगा।