सीरिया में तख्तापलट इजराइल के लिए चुनौती है या मौका:मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा तो 92 लाख भारतीयों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Updated on 11-12-2024 02:19 PM

सीरिया की राजधानी दमिश्क में जश्न का माहौल है। असद परिवार के 54 साल का किला महज 11 दिनों में ढह गया। राष्ट्रपति बशर अल असद मॉस्को भाग गए हैं। जिस सीरिया में कभी असद खानदान का बोलबाला था आज वहां उनके परिवार का कोई नहीं बचा। देश में जगह-जगह पर बशर और उनके पिता की निशानियों को मिटाया जा रहा है।

विद्रोही गुट हयात तहरीर अल-शाम (HTS) राजधानी को नियंत्रण में ले चुका है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश जिस अलकायदा से सालों तक लड़ते रहे, उसी अलकायदा का हिस्सा मानी जाने वाली हयात तहरीर अल-शाम (HTS) का सत्ता परिवर्तन करने पर स्वागत कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट एक बार फिर शांति और अशांति के दोराहे पर खड़ा है।

इस तख्तापलट ने दुनिया के सामने कई अनसुलझे सवाल छोड़े दिए हैं। जैसे सीरिया में तख्तापलट से मिडिल ईस्ट में क्या होगा या फिर इससे इजराइल पर क्या असर पड़ेगा? ऐसे ही कुछ जरूरी सवालों पर हमने सीनियर डिफेंस एक्सपर्ट कमर आगा और इंडियन वर्ल्ड काउंसिल के सीनियर रिसर्च फेलो फज्जुर रहमान सिद्दीकी से बात की...

1) क्या अरब स्प्रिंग की चिंगारी अभी तक सुलग रही थी?

2010 में ट्यूनीशिया से शुरू हुआ अरब स्प्रिंग कई मिडिल ईस्ट देशों की सत्ता परिवर्तन कारण बना था। 2011 तक आंदोलन की लपटें दक्षिणी सीरिया तक पहुंचीं और देखते ही देखते पूरे देश में फैल गई। हालांकि, सीरिया में बशर अल असद अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रहे थे।

लेकिन 27 नवंबर 2024 को शुरू हुए विद्रोह ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया। विद्रोह इतना तेज था कि महज 11 दिन में सीरिया में सत्ता परिवर्तन हो गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये अरब स्प्रिंग का ही विस्तार था या एक नए तरह का आंदोलन था।

2) इजराइल के लिए मिडिल ईस्ट में नई चुनौती या मौका?

बशर की सत्ता का खात्मा होते ही इजराइल ने इसका स्वागत किया। खुद प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इसे मिडिल ईस्ट के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। पिछले डेढ़ साल में इजराइल ने गाजा से हमास का सफाया कर दिया। लेबनान में हिज्बुल्लाह से सीजफायर कर लिया और अब सीरिया में बशर की सत्ता का खात्मा हो गया। विद्रोही लड़ाकों के दमिश्क पहुंचते ही इजराइल ने अपने कदम गोलान हाइट्स की तरफ बढ़ा दिए।

हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि दमिश्क पर कब्जा करने वाले हयात तहरीर अल-शाम से इजराइल के रिश्ते कैसे होंगे।



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