भोपाल। मिसरोद के जाटखेड़ी स्थित निरुपम रायल पाम कालोनी में रहने वाले 31 वर्षीय आइटी प्रोफेशनल सिद्धार्थ खुराना ने आत्महत्या कर ली। दर्द रहित मौत के लिए उन्होंने रेस्पिरेटरी मास्क बनाया। उसे मुंह में लगाकर नाइट्रोजन हाइपोक्सिया के माध्यम से आत्महत्या कर ली। पुलिस को उसके पास से एक डायरी मिली है। इसमें सिद्धार्थ ने तीन पेज में खुद की जान लेने की पूरी योजना का उल्लेख किया है और कारण भी लिखा है। इस सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस का दावा है कि सिद्धार्थ बेहद तनाव में था।
फोन रिसीव न करने पर हुई शंका
सिद्धार्थ की मौत का पता तब चला, जब पड़ोसी युवक केदार ने घरेलू सहायक के बारे में जानकारी लेने के लिए सिद्धार्थ को कई बार फोन किया लेकिन जवाब नहीं मिला। इसके बाद वह उसके कमरे पर पहुंचा। कोई जवाब नहीं मिला तो संदेह होने पर उसने अन्य पड़ोसियों को बुलाया और दरवाजा तोड़ा। कमरे के अंदर का मंजर देखकर हर कोई हैरान रह गया और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने बताया कि उसकी मौत करीब तीन दिन पहले हुई थी।
यह है नाइट्रोजन हाइपोक्सिया
सिद्धार्थ खुराना ने दर्द रहित मौत के लिए नाइट्रोजन गैस के श्वसन का जो तरीका चुना था, उसे वैज्ञानिक भाषा में नाइट्रोजन हाइपोक्सिया कहा जाता है। यह आक्सीजन निकालकर तथा नाइट्रोजन गैस को अंदर खींचकर मृत अवस्था तक पहुंचने की एक विधि है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति के शरीर में आक्सीजन की कमी और नाइट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है। नाइट्रोजन एक निष्क्रिय गैस है, जिससे शरीर में रासायनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं होती है। आक्सीजन के स्तर में धीरे-धीरे कमी आती है, बेहोशी होती है और अगर नाइट्रोजन का संपर्क जारी रहता है तो मृत्यु हो जाती है। हाल ही में मौत का यह तरीका तब सुर्खियों में आया था, जब अमेरिका के अलबामा राज्य में एक व्यक्ति को कोर्ट द्वारा नाइट्रोजन हाइपोक्सिया के रूप में मृत्युदंड दिया गया था। सिद्धार्थ के मामले में भी यह शंका जताई जा रही है कि उसने इंटरनेट के माध्यम से इस विधि के बारे में जाना होगा। उसने एक मोटी पालीथिन से पहले पूरे मुंह को ढंका और फिर नीचे से नाइट्रोजन का पाइप उस मास्क में डाला। साथ ही पूरी पालीथिन को गले के आसपास टेप से बांधकर पैक कर दिया। इससे पूरे मास्क में सिर्फ नाइट्रोजन फैलने लगी और संभवत: इससे सिद्धार्थ का शरीर निष्क्रिय हो गया और मौत हो गई।
लखनऊ में रहता है सिद्धार्थ का परिवार
सिद्धार्थ का परिवार लखनऊ के संत मार्केट, महानगर कालोनी में रहता है। सिद्धार्थ के पिता वहां एक जनरल स्टोर चलाते हैं। सिद्धार्थ अकेले भोपाल में रहकर आइटी कंपनी में नौकरी कर रहे थे। नवंबर में उनकी नौकरी भी छूट गई थी। जांच अधिकारी निर्मल वर्मा ने बताया कि सिद्धार्थ के मानसिक रूप से बीमार होने के डाक्टरी पर्चे मिले हैं। तीन पेज के नोट में सिद्धार्थ ने जीवन के कुछ कड़वे अनुभव भी डायरी में लिखे थे।