पीड़िता की ननद विनीता वर्मा ने बताया कि भाभी को 11 मई को भर्ती किया था। डिलीवरी की डेट नहीं आई थी, लेकिन भाभी को लगातार लेबर पेन हो रहा था। मौके पर नर्स और डाक्टर को भी इसके बारे में बताया, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। उनका कहना था कि मां बन रही है तो दर्द होगा ही। दोपहर के करीब साढ़े तीन बजे बिस्तर पर ही डिलेवरी हो गई। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कोई भी नर्स और डाक्टर उपलब्ध नहीं था। बाद में हंगामा होने के बाद डाक्टर अन्य स्टाफ पहुंचा।
नसबंदी के दौरान महिला की हुई थी मौत
बता दें कि इससे पहले मंगलवार को काटजू अस्पताल में नसबंदी कराने आई महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मंगलवार दोपहर करीब एक बजे रीना गौर नामक महिला को सर्जरी के लिए डाक्टर ओटी में ले गए। जैसे सर्जरी शुरू हुई महिला की स्थिति बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। मृतका के पति ने आरोप लगाया कि एनेस्थिसिया के ओवर डोज की वजह से उसकी पत्नी की मौत हुई है।
इनका कहना है
मेरी तबीयत खराब है, इसलिए मैं अस्पताल में नहीं जा रहा हूं। आपसे मिली जानकारी के अनुसार मामले की जांच करवाता हूं।
- डा. कर्नल प्रवीण सिंह, अधीक्षक काटजू अस्पताल