जिले में एक हजार अवैध कालोनियां, सरकारी जमीन पर हो रहे कब्जे

Updated on 22-05-2024 12:20 PM
भोपाल। जिले में अवैध कालोनियों को लेकर जिला प्रशासन कितना सजग और सख्त है, इसका उदाहरण कार्रवाई के दावों को देखकर लगाया जा सकता है। यही वजह है कि कुछ दिन मुहिम चलाई जाती है लेकिन फिर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। नतीजतन बीते एक वर्ष में जिले में एक हजार से अधिक अवैध कालोनियां विकसित हो गई हैं। खास बात तो यह है कि सरकारी जमीनों तक पर कब्जे किए जा रहे हैं। इसके बाद भी प्रशासन द्वारा इन पर कोई सख्ती नहीं बरती जा रही है।

यही नहीं, कार्रवाई के नाम पर एसडीएम सिर्फ सर्वे कराकर रिपोर्ट बना रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि जिले से लगी सीमा पर कृषि भूमि पर अवैध कालोनियों काटी जा रही हैं। भूमाफिया किसानों के साथ मिलकर बिना किसी अनुमति के प्लाट काटते हुए मनमाने दामों पर बेच रहे हैं। ऐसे प्रकरण राजधानी से सटे बैरसिया, नीलबड़ इलाके में ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण तो पिछले दिनों तैयार की गई कलेक्टर गाइडलाइन भी है, यहां तय दाम से अधिक पर रजिस्ट्रियां दर्ज हुई थीं।

कम दाम का देते हैं झांसा, सड़क किनारे लगाए बोर्ड

जिले में भूमाफिया शहरी क्षेत्र से लगी बैरसिया रोड, गोलखेड़ी, दुपाड़िया, भोपाल बायपास, इमलिया, सेमरा, मालीखेड़ी, दामखेड़ा, कोलुआ, अरवलिया, परवलिया, ईंटखेड़ी, जगदीशपुर, देवलखेड़ी, श्यामपुर, पुरामनभावन, मुगालिया कोट, अचारपुरा, डोबरा, मुबारकपुर, भौंरी, खजूरी सड़क, कोलार, गेहूंखेड़ा, ईंटखेड़ी छाप, मुगालिया छाप, रातीबड़, नीलबड़, सिकंदराबाद, सलैया,प रवलिया सड़क, गांधीनगर, पलासी, अयोध्या बायपास, आनंद नगर, बिलखिरिया, भोजपुर सड़क, सूखीसेवनियां, ओंकारा सेवनियां, बालमपुर सहित अन्य क्षेत्रों में बिना किसी अनुमति के एक हजार से अधिक अवैध कालोनियां बना रहे हैं। यहां पर लोगों को 700 से 800 रुपये वर्गफीट में प्लाट देने का झांसा दिया जाता है। इसके लिए बाकायदा कालोनाइजरों द्वारा कार्यालय खोलकर सड़क किनारे बोर्ड भी लगाए गए हैं।

दावा तमाम सुविधाओं का, अनुमति सिर्फ डायवर्सन की

जिले की नगरीय और ग्रामीण सीमाओं में भूमाफिया सक्रिय हैं। यहां कालोनियों को काटते समय अनुमति के नाम पर सिर्फ डायवर्सन लेते हैं। जबकि प्लाट बेचने के लिए सड़क, बिजली, पानी, सीवेज, पार्क, मंदिर सहित अन्य सुविधाएं होने का दावा करते हैं। आमजन इनकी बातों में आकर प्लाट तो ले लेते हैं लेकिन बाद में उक्त सुविधाओं के लिए नगर निगम, कलेक्ट्रेट, तहसील कार्यालयों में चक्कर लगाना पड़ते हैं।

हुजूर और कोलार में सबसे अधिक अवैध कालोनी

शहर की दो बड़ी तहसील हुजूर और कोलार क्षेत्र में सबसे अधिक अवैध कालोनियां विकसित हुई हैं। तहसील हुजूर की जो ग्राम पंचायतें नगरीय सीमा से लगी हुई हैं वहां पर कृषि भूमि पर भूमाफिया किसानों के साथ मिलकर अवैध रूप से प्लाट बेच रहे हैं। इन कालोनी में प्लाट लेने के बाद कई तरह के विवाद भी होते हैं। ऐसे कई प्रकरण हुजूर और कोलार तहसील में लंबित हैं। इनमें नामांतरण, बंटान आदि नहीं होने के मामले शामिल हैं।

कुछ दिन चलने के बाद कार्रवाई हो जाती है ठप

प्रशासन द्वारा हर वर्ष अवैध कालोनियों पर कार्रवाई करने की मुहिम चलाई जाती है लेकिन वह एक निश्चित समय के बाद बंद हो जाती है। दरअसल कालोनाइजर एक-दो कार्रवाई के बाद घबरा जाते हैं और कलेक्ट्रेट के चक्कर लगाना शुरू कर देते हैं। इसके बाद से ही सभी मामले गोलमाल हो जाते हैं। लिहाजा, कुछ कालोनाइजर पर एफआइआर दर्ज कर मुहिम ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है।

यह मामले आ चुके हैं पूर्व में सामने

भूमाफिया ने बेच डाली थी सरकारी जमीन

7 अप्रैल: एमपी नगर क्षेत्र में शहर से लगी पंचायत पिपलिया पेंदे खां में पौने दो एकड़ सरकारी जमीन पर भूमाफिया भैया भाई, शहजाद, जहीर अहमद ने दान पत्र पर प्लाट बेच दिए थे, जिसकी कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये बताई गई थी।

7 मार्च: नरेला विधानसभा के ग्राम बड़वई में मोहम्मद युसूफ और जयप्रकाश आसवानी द्वारा बिना अनुमति कृष्णा कुंज नाम से कालोनी के विकसित की जा रही थी, जिस पर प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाया गया था।

22 दिसंबर: हुजूर तहसील के ग्राम छावनी पठार आदमपुर में 30 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कालोनी विकसित की जा रही थी। प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की गई थी, जिसकी कीमत चार करोड़ रुपये बताई थी।

कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से सीधी बात

अवैध कालोनियों को लेकर क्या कार्रवाई हो रही है?

- जिले के सभी सर्कल के एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध कालोनियों को चिह्नित कर उनकी सूची तैयार की जाए। सभी तरह की अनुमति नहीं होने पर एफआइआर दर्ज करने की कार्रवाई करें।

सरकार ने 2022 तक की अवैध कालोनियों को वैध कर दिया था तो क्या हाल में बनी कालोनियों ही अवैध मानी जाएंगी?

- अवैध कालोनियों को लेकर किसी तरह का कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ था। जो पहले वैध हो गई वो ठीक हैं। अब जो बची हैं, वह सभी अवैध ही मानी जाएंगी।

अवैध कालोनियों पर एफआइआर के अलावा प्रशासन और क्या-क्या कार्रवाई करेगा?

- जिले में अभी तक कुल छह प्रकरण कलेक्ट्रेट कोर्ट में अवैध कालोनियों के आए हैं। इसके अलावा भी प्रकरण आएंगे। इन कालोनियों को प्रशासन अधिग्रहीत करेगा और जो बचे हुए प्लाट हैं उनको बेचने पर जो राजस्व आएगा उससे विकास कार्य कराए जाएंगे।

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