
इस सूचना पर सीबीआइ दिल्ली की टीम ने जाल बिछाते हुए गत 20 मई को नर्सिंग कालेजों की जांच कर रहे सीबीआइ निरीक्षक राहुल राज, सीबीआइ में प्रतिनियुक्ति पर तैनात मप्र पुलिस के निरीक्षक सुशील कुमार मजोका सहित 13 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें कुछ कालेजों के संचालक भी शामिल थे। सीबीआइ ने राहुल राज को बर्खास्त कर दिया था।
इधर सीबीआइ रिश्वतकांड सामने आने के बाद मप्र के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने नर्सिंग कालेजों को मान्यता देने में धांधली करने वालों की बर्खास्तगी का निर्देश दिया। इसके बाद शासन ने मानकों की अनदेखी कर नर्सिंग कालेजों को मान्यता देने वाले 111 अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस थमाया है। उधर, सीबीआइ द्वारा अपात्र बताए गए कालेजों को बंद कराने का काम भी मंगलवार से शुरू हो गया है।
हाई कोर्ट ने सीबीआइ जांच में उपयुक्त पाए गए नर्सिंग कालेजों की पुन: जांच के दिए निर्देश मप्र हाई कोर्ट ने सीबीआइ जांच में उपयुक्त पाए गए 169 नर्सिंग कालेजों की न्यायिक दंडाधिकारी की उपस्थिति में पुन: सीबीआइ जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
मंगलवार को न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी व न्यायमूर्ति एके पालीवाल की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआइ को निर्देशित किया है कि जांच की वीडियो व फोटोग्राफी भी कराई जाए। इस दौरान कालेज के संचालक व प्राचार्य भी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। याचिका की अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।
नर्सिंग कालेजों की जांच में रिश्वत लेने-देने के 13 में से नौ आरोपितों को सीबीआइ ने पुलिस रिमांड पूरी होने पर मंगलवार को भोपाल में विशेष न्यायाधीश राम प्रसाद मिश्र के न्यायालय में पेश किया गया। यहां से आरोपितों को जेल भेज दिया गया। बता दें की सीबीआइ की विजिलेंस टीम ने मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर और रतलाम के अलावा राजस्थान के जयपुर में 31 स्थानों पर छापेमारी कर सीबीआइ के चार अधिकारियों समेत लगभग 23 लोगों के विरुद्ध केस दर्ज किया था।
आरोपितों के घर व कार्यालय से दो करोड़ 33 लाख रुपये नकद के अतिरिक्त सोने के चार बिस्किट और 36 डिजिटल डिवाइस बरामद की थी। गिरफ्तार सभी 13 आरोपितों को सीबीआइ ने 29 मई तक पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में लिया था। दिल्ली ले जाकर उनसे पूछताछ की गई। रिमांड पूरी होने के एक दिन पहले ही इनमें नौ को कोर्ट में प्रस्तुत कर दिया गया। बचे चार आरोपितों को बुधवार को पेश किया जाएगा। सभी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्रकरण कायम किया गया है।