
राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक इन बंदरों के आतंक की शिकायतें पहुंच रही हैं। जिसमें बंदरों द्वारा जनहानि पहुंचाने की भी शिकायतें हैं। इसके दृष्टिगत केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों से इन बंदरों को अनुसूची में शामिल करने के लिए सुझाव मांगे हैं ताकि इसी अनुरूप वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची में इन बंदरों को फिर से शामिल किया जा सके।
वन्यजीव विशेषज्ञ इसके लिए उन लोगों को जिम्मेदार मानते हैं, जो आस्था के नाम पर जंगल किनारे बैठे बंदरों को खाद्य सामग्री डालते हैं। वन्य प्राणी विशेषज्ञ डॉ. सुदेश बाघमारे कहते है कि आस्था की दृष्टि से काले मुंह के बंदर हनुमान बंदर है, भ्रम के कारण लाल मुंह के बंदरों को हनुमान बंदर मान लिया जाता है। इसी भ्रम के कारण लाल मुंह के बंदरों को लोग खाद्य सामग्री खिलाते है जिससे उनकी आदत बिगड़ रही है।