
रातापानी सेंचुरी के झिरी रेंज में बाघिन की मौत के बाद अनाथ हुए दो शावकों को कान्हा नेशनल पार्क भेजा गया है। अब यहां दोनों शावक जंगल में रहने के तौर-तरीके सीखेंगे और दो साल तक शिकार की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद उन्हें किसी अन्य टाइगर रिजर्व में भेज दिया जाएगा।
कान्हा नेशनल पार्क में पहुंचे जय और वीरू को अभी एक छोटे बाड़े में रखा गया है। पार्क के डायरेक्टर सुनील कुमार ने बताया कि यहां पर उन्हें पहले मुर्गा और मुर्गी का शिकार करना सिखाया जाएगा। यह ट्रेनिंग का पहला चरण होगा।
इसके लिए विशेष बाड़ा बनाया गया है। तीन माह बाद इन्हें दूसरे बाड़े में शिफ्ट किया जाएगा। जहां उनके लिए छोटे मवेशी बाड़े में छोड़े जाएंगे। ऐसा करते हुए जब तक वे बड़े जानवरों का शिकार करना नहीं सीखते, तब तक बाड़े में ही उन्हें ट्रेंड किया जाएगा।
वयस्क होने के बाद छोड़ेंगे जंगल में
जय और वीरू को वयस्क होने यानि 18 से 20 माह तक रखा जाएगा। जब यह तय हो जाएगा कि अब वे बड़े जानवरों का जंगल में शिकार कर सकते हैं तो उन्हें किसी भी टाइगर रिजर्व में भेज दिया जाएगा।
आक्रामकता के कारण इंसानों से दूर रखने का निर्णय
बाघ शावकों को वन विहार से कान्हा नेशनल पार्क भेजा गया है। दोनों शावकों में आक्रामकता वैसी है, जैसी मां के साथ रहने पर रही है। यही वजह है कि इन्हें इंसानों से दूर रखकर पालने का निर्णय लिया है, ताकि उन्हें जंगल में पुनर्वासित किया जा सके। यह अपने तरह का अलग ही प्रयोग है।
अतुल श्रीवास्तव, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ