
भोपाल साइबर क्राइम सेल के मुताबिक शहर में सबसे ज्यादा मामले शेयर मार्केट में निवेश के सामने आए हैं। साथ ही पेड गेम के नाम पर इंस्टाल किए जाने वाले एप्स के माध्यम से भी काफी राशि ठगी जा रही है। आरोपित लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेजते हैं, जिन्हें गेम में आसान से टास्क देकर पैसे देने की बात कही जाती है। इसके बाद जब वे लिंक पर क्लिक करते हैं और वेबसाइट या एप को मोबाइल की अनुमति देते हैं। इसी के जरिए वे राशि ठग लेते हैं। वहीं साइबर ठगी का क्लासिक ओटीपी फ्राड अब भी लोगों को ठगने के लिए अपराधियों का प्रमुख अस्त्र बना हुआ है।
आनलाइन अपराध का यह जाल यूं तो ठग सभी पर बराबरी से फेंकते हैं, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा शिकार हाउस वाइफ और बुजुर्ग बनते हैं। पेड गेम में टास्क करने वाले मामलों में महिलाओं की कई शिकायतें दर्ज की गई हैं। साइबर अपराध के प्रति जागरूकता की कमी के चलते बुजुर्ग भी ठगे जाते हैं। वहीं बेरोजगार युवकों की फिशिंग के लिए ठग उन्हें लुभावने जाब आफर देते हैं। जिसके लिए पहले छोटी-मोटी राशि ली जाती है और फिर वो रूपये फंसने के बाद उनसे बड़ी रकम वसूली जाती है।
साइबर अपराध टेलीकाम और बैंकिंग की कड़ी से जुड़ा हुआ है। ठग पहले मोबाइल को निशाना बनाते हैं और फिर बैंक से पैसे गायब करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि अंधाधुंध बिकने वाली सिमों पर नजर रखी जाए। साथ ही बैंकिंग सिस्टम को भी अलर्ट रखना होगा, जिससे की अपराध होने से पहले पुलिस को संदेहियों की जानकारी मिल सके। इससे न अपराधों पर रोक लगेगी और अपराधी शिकंजे में कसे जाएंगे।
इनका कहना है
साइबर अपराध पर नकेल कसने पुलिस की कार्रवाई जारी है। भविष्य में इन मामलों में कमी लाने विभाग योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है। इस कड़ी को तोड़ने जरूरी है कि हम बैंकिंग और टेलीकाम सिस्टम में कुछ सुधार करें।
तरूण कुरील, प्रभारी अधिकारी, साइबर क्राइम सेल