सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने ट्रंप के टैरिफ का उड़ाया फ्यूज, भारत पर ऐसे पड़ेगा असर, आगे क्‍या होगा?

Updated on 21-02-2026 12:41 PM
नई दिल्‍ली: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ का फ्यूज उड़ा दिया है। उसने ट्रंप प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। ऐसा करते हुए राष्ट्रपति के ग्‍लोबल टैरिफ को गैर-कानूनी करार दिया है। 6-3 के फैसले में कोर्ट ने कहा कि अंतरराष्‍ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) - 1977 का कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसमें सिर्फ राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान कुछ अंतरराष्‍ट्रीय लेनदेन को विनियमित या प्रतिबंधित करने का अधिकार देता है। यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार रणनीति के लिए एक बड़ा झटका है। IEEPA टैरिफ से प्रभावित देशों में कनाडा, चीन, मैक्सिको, भारत, ब्राजील और दर्जनों अन्य देश शामिल थे। इन्‍हें ऊंचे 'रेसिप्रोकल' टैरिफ का सामना करना पड़ रहा था । अदालत के फैसले से ट्रंप की शक्तियां सीमित हो गई हैं। इसका भारत पर भी बड़ा असर पड़ेगा।

टैरिफ स्‍ट्रैटेजी के लिए क्‍यों बड़ा झटका?

प्रशासन ने तर्क दिया था कि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के दौरान राष्ट्रपति को 'आयात को विनियमित करने' की अनुमति देने वाला IEEPA का प्रावधान उन्हें टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। आलोचकों ने तर्क दिया कि कानून किसी भी समय, किसी भी देश पर, किसी भी आकार के एकतरफा टैरिफ की अनुमति नहीं देता है। यह एक ऐसा नजरिया है जिसे 'सुप्रीम कोर्ट ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स' में मामला पहुंचने से पहले एक संघीय व्यापार अदालत और एक संघीय अपील अदालत ने पहले समर्थन दिया था। IEEPA टैरिफ पिछले साल अमेरिकी टैरिफ राजस्व का ज्‍यादातर हिस्सा थे। अदालत का फैसला ट्रंप के व्यापार ढांचे के एक केंद्रीय स्तंभ पर सीधा प्रहार है।

भारत पर कैसे पड़ेगा असर?

भारत के नजरिए से इस फैसले का कई तरह से असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इन टैरिफ को 'गैर-कानूनी' घोषित किए जाने के बाद भारतीय निर्यातकों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ से निजात मिलेगी। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में एक अंतरिम ट्रेड डील पर सहमति बनी है। इसमें टैरिफ घटाकर 18% किए गए हैं। 'सुप्रीम' फैसले के बाद भारत भारत अब व्‍यापार वार्ता में बेहतर स्थिति में होगा। रूसी तेल खरीद पर दंडात्‍मक कार्रवाई करने की शक्ति सीमित हो गई है। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अनिश्चिता खत्‍म होगी। कोर्ट ने साफ किया है कि टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है। राष्‍ट्रपति अकेले ऐसा नहीं कर सकते हैं। इससे आगे चलकर अचानक लगने वाले ट्रेड सैंक्‍शन का खतरा कम हो गया है।

रिफंड को लेकर क्‍यों अनिश्चितता?

यह अभी भी साफ नहीं है कि व्यवसायों या उपभोक्ताओं को IEEPA के तहत जुटाए गए टैरिफ के लिए धनवापसी मिलेगी या नहीं। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कंपनियां अदालतों के जरिये मुआवजे की मांग कर सकती हैं। लेकिन, उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष भुगतान के लिए मुमकिन है कि कांग्रेस की कार्रवाई की जरूरत होगी। फिर भले ही ट्रंप ने पहले 2,000 डॉलर के 'डिविडेंड' चेक की बात की हो।

क्‍यों आगे बढ़ेगी मुकदमेबाजी?

रेट‍िंंग एजेंसी मूडीज के मुख्य अर्थशास्त्री मार्क जैंडी ने सीएनबीसी को बताया कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर चुप रहता है और प्रशासन कोई मुआवजा प्रदान नहीं करता है तो व्यवसायों की ओर से महत्वपूर्ण कानूनी कार्रवाई होने की संभावना है। इस पर अंत में अदालत को निर्णय लेना होगा,"

ट्रंप ने दी थी क्‍या चेतावनी?

ट्रंप ने टैरिफ को एक लीवरेज और लाइफलाइन दोनों के रूप में पेश किया था। विदेशी सरकारों से व्यापार, आप्रवासन, ड्रग एनफोर्समेंट और सैन्य संघर्षों पर रियायतें निकालने का एक उपकरण का आधार बनाया था। दावा था कि वह अंत में इससे इनकम टैक्‍स को रिप्‍लेस कर सकती है। उन्होंने अमेरिकियों को 2,000 डॉलर के टैरिफ डिविडेंड चेक भेजने का भी प्रस्ताव दिया था। ट्रंप ने 12 जनवरी को सोशल मीडिया पर कहा था, 'हम बर्बाद हो जाएंगे! अगर कोर्ट टैरिफ को पलट देता है।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर टैरिफ लागू नहीं होते तो देश को 'आर्थिक आपदा' का सामना करना पड़ेगा। मामले को 'जिंदगी और मौत' का मामला बताया था।

उपभोक्ता लागत पर क्‍या असर होगा?

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि टैरिफ ने पहले ही कीमतें बढ़ा दी हैं। 2025 में फर्नीचर और कपड़ों से लेकर भोजन, इलेक्ट्रॉनिक्स और कारों तक के आयात पर हर घर के लिए लगभग 1,000 डॉलर की लागत बढ़ा दी थी। सीएनबीसी की एक रिपोर्ट में टैक्स फाउंडेशन के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी थी। 2026 के लिए यह अतिरिक्त बोझ 1,300 डॉलर से 1,700 डॉलर के बीच बढ़ने का अनुमान था।

IEEPA टैरिफ अब समाप्त कर दिए गए हैं। ऐसे में विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले साल घरेलू लागत लगभग आधी हो सकती है। इससे बोझ में एक अनुमान के मुताबिक, 600 डॉलर से 800 डॉलर की कटौती होगी। हालांकि, कीमतें 2025 से पहले के स्तर पर लौटने की संभावना नहीं है। कारण है कि अलग-अलग कानूनों के तहत लगाए गए अन्य टैरिफ अभी भी लागू हैं।

क्‍या अभी भी ट्रंप के पास कानूनी रास्ते खुले हैं?

ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह अपनी टैरिफ व्यवस्था के कुछ हिस्सों को बनाए रखने के लिए व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 सहित अन्य प्राधिकरणों की ओर रुख कर सकता है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि IEEPA-आधारित टैरिफ के अमान्य होने पर वैकल्पिक वैधानिक उपकरण उपलब्ध हैं। हालांकि, ट्रंप ने तर्क दिया है कि कोई भी उतना सीधा या उतना शक्तिशाली नहीं है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 13 March 2026
नई दिल्‍ली: पश्चिम एशिया में टेंशन के बीच होर्मुज स्‍ट्रेट का नाम हर किसी की जुबान पर है। यह ईरान के दक्षिण में पतला पानी का रास्‍ता है। फारस की खाड़ी…
 13 March 2026
नई दिल्‍ली: महेश चूरी पालघर (महाराष्‍ट्र) के गांव बोर्डी के रहने वाले हैं। उन्‍होंने इस गांव में ही बिजनेस का जबरदस्‍त मॉडल खड़ा करके दिखाया है। वह 'चीकू पार्लर' के…
 13 March 2026
नई दिल्‍ली: स्थानीय शेयर बाजारों में बीते गुरुवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट आई थी। पश्चिम एशिया में संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में तेजी आने से ऐसा हुआ…
 13 March 2026
नई दिल्लीः बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने गुरुवार को निवेशकों की मृत्यु के बाद उनके शेयरों और निवेश को वारिसों के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रस्ताव…
 13 March 2026
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में भी संघर्ष बढ़ गया है। इसके चलते भारत और चीन समेत कई एशियाई देशों को होने वाली तेल और गैस की सप्लाई…
 11 March 2026
नई दिल्‍ली: स्थानीय शेयर बाजारों में बीते मंगलवार को दो दिन से जारी भारी गिरावट पर ब्रेक लगा था। बीएसई सेंसेक्स 640 अंक के फायदे में रहा था। जबकि एनएसई निफ्टी…
 11 March 2026
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के लिए डिविडेंड (लाभांश) देने से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब बैंक अपने शेयरधारकों को अपने…
 11 March 2026
नई दिल्‍ली: केवीएस मणियन बैंकिंग जगत में जाना-माना नाम हैं। वह फेडरल बैंक के एमडी और सीईओ हैं। सितंबर 2024 में उन्‍होंने इस बैंक की कमान संभाली थी। इस बैंक का…
 11 March 2026
नई दिल्ली: मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंस्ट्रीज अमेरिका में बनने वाली ऑयल रिफाइनरी में निवेश करेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका दावा किया है। इसके लिउ उन्होंने रिलायंस को…
Advt.