
भोपाल देश का एकमात्र शहर है, जहां 10 किमी के दायरे में बाघ अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। हाल के दिनों में समरधा रेंज में बाघों के देखे जाने के मामले अचानक बढ़ गए हैं। वजह यह है कि यहां बाघों का कुनबा बढ़ गया है। यहां एक-दो नहीं, बल्कि 17 बाघ शावकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। ये सभी बाघ शावक वर्ष 2022 में हुई गणना के बाद पैदा हुए हैं। इनकी उपस्थिति वर्ष 2026 में होने वाली गणना में शामिल होगी।
वन विभाग अब ने केवल भोपाल और आसपास घूम रहे बाघों के लिए नए सिरे से डाटा एकत्रित कराएगा, बल्कि सभी बाघ शावकों की भी कुंडली तैयार कराएगा ताकि इनके मूवमेंट पर नजर रखी जा सके। समरधा रेंज में इस समय 5 बाघिन, 17 शावक और 3 नर बाघ का मूवमेंट है। वर्ष 2022 की गणना में भोपाल (समरधा रेंज) में 9 बाघों की पुष्टि हुई थी।
दो बाघिनों के 4-4 शावक घूम रहे
भोपाल वन मंडल के डीएफओ आलोक पाठक ने बताया कि समरधा रेंज में 5 बाघिनों का मूवमेंट है। सभी के साथ शावक हैं। इनमें दो बाघिनों के 4-4 शावक हैं, वहीं तीन बाघिनों के साथ 3-3 शावक हैं। इनकी उम्र 3 माह से लेकर 12 माह तक है। हमें ब्रीडिंग की सूचना भी मिल रही है, ऐसे में आने वाले 6 माह में इलाके में शावकों की संख्या बढ़ सकती है।
600 ट्रैप कैमरों की जरूरत, प्रस्ताव भेजा
वन अफसरों के मुताबिक भोपाल देश का ऐसा शहर है, जहां सबसे बेहतर इको सिस्टम है। इसी कारण बाघ बढ़ रहे हैं। अब यहां संसाधन बढ़ाना जरूरी है। कलियासोत से केरवा तक बाघों के मूवमेंट व काॅरिडोर को देखते हुए पेट्रोलिंग टीम की संख्या बढ़ाना होगी। साथ ही ट्रैप कैमरों की संख्या 11 से बढ़ाकर 600 करने की जरूरत है। ये प्रस्ताव वाइल्ड लाइफ मुख्यालय को भेजा है।
16 साल में अभी तक बाघ और इंसानों के बीच संघर्ष की कोई घटना नहीं हुई
अधिकारियों का कहना है कि भोपाल देश का एकमात्र शहर है, जहां वर्तमान में 17 शावक मिलाकर 25 बाघों का मूवमेंट है। पिछले 16 सालों में एक भी घटना नहीं हुई जिसमें बाघ और इंसान के बीच संघर्ष की स्थिति बनी हो। जबकि टाइगर रिजर्व के गांवों के आसपास अक्सर ऐसी स्थिति बनती है।