
जो भी पदाधिकारी अपने दायित्व का निर्वहन ईमानदारी और समर्पण भाव से नहीं कर पाएगा, उसकी जगह किसी अन्य ऊर्जावान नौजवान साथी को अवसर दिया जाएगा। दूसरे दिन की चर्चा में मितेंद्र ने यह भी कहा कि इस सोच के साथ काम नहीं करना है कि अब अगला चुनाव पांच साल बाद होगा। संगठन का सोच हर दिन चुनाव लड़ने जैसा होना चाहिए।