
कर्ज में डूबी भाजपा सरकार आने वाले सालों में आर्थिक संकट से उबरने के लिए अब जनता की भागीदारी से विकास कार्य कराने पर फोकस करेगी। इसके लिए नगरीय विकास विभाग जनसहभागिता योजना के माध्यम से नगरीय क्षेत्रों में विकास कार्य कराएगा। जुलाई में आने वाले वित्त बजट के लिए शुरू हुई बैठकों में बजट प्रस्ताव में नगरीय विकास विभाग ने वित्त विभाग को इसका प्रस्ताव भी दे दिया है।
करीब पौने चार लाख करोड़ के कर्ज में डूबी सरकार को अब वित्तीय संकट से उबारने के लिए अधिकारी ऐसे प्रस्ताव ला रहे हैंं जिससे विकास कार्यों में सरकार के खर्च में कमी लाई जा सके। इसी तारतम्य में नगरीय विकास विभाग की ओर से वित्त विभाग को जनभागीदारी की तर्ज पर जनसहभागिता योजना का प्रस्ताव दिया गया है। इसमें प्रस्ताव है कि नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्र में कराए जाने विकास के हर कार्यों में जनता की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा और जन सहयोग से मिलने वाली राशि से विकास कार्य कराए जाएंगे।
जनता और सरकार के फंडिंग के स्लैब तय किए जाएंगे
अफसरों के अनुसार इस योजना को लेकर बड़े शहरों और नगर निगमों, नगर पालिकाओं तथा नगर परिषदों में जनता से ली जाने वाली राशि और सरकार की ओर से दी जाने वाली राशि को लेकर स्लैब और अनुपातिक राशि तय की जाएगी। बताया जाता है कि अब तक इसके लिए जो प्रावधान तय किए गए हैं उसमें बड़े शहरों में 40:60 का अनुपात रखा जाएगा जबकि नगर परिषदों के लिए 70:30 का अनुपात रखने का प्रस्ताव है जिसके मुताबिक सत्तर फीसदी राशि सरकार देगी और 30 फीसदी जनता से ली जाएगी। इसमें नगर पालिकाओं के क्षेत्र में विकास के लिए नगर परिषद से कम और नगर निगम से अधिक राशि दिए जाने का प्रस्ताव है।
विकास कार्य से भावनात्मक लगाव पैदा करने इस तरह का बंधन भी रहेगा
जनसहभागिता के कामों में इस तरह का बंधन भी रखने का प्रस्ताव है कि किसी विकास कार्य के लिए राशि तभी दी जाएगी जब जनता की भागीदारी से मिलने वाली 70 फीसदी राशि जमा हो जाएगी। इतनी राशि जमा न होने के पहले शासन स्तर से संबंधित काम को मंजूर नहीं किया जाएगा। अफसरों का कहना है कि इस तरह की योजना बनाने का उद्देश्य यह है कि लोगों में उनके शहर और कालोनी में होने वाले विकास कार्यों से भावनात्मक लगाव पैदा हो। वित्त विभाग को दिए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि अगर पब्लिक का पैसा विकास कार्य में लगेगा तो जिसका पैसा लगेगा वह सड़क, भवन समेत सभी तरह के विकास और निर्माण कार्य में उसी तरह की निगरानी करेगा जैसा कि अपने खुद के निर्माण कार्य में करता है। इससे करप्शन रोकने में भी मदद मिलेगी।
एससी-एसटी बस्तियों में पूरे वार्ड पर फोकस
नगरीय इलाकों में बने वार्डों में कराए जाने वाले विकास कार्यों के मामले में इस योजना में एक प्रस्ताव यह भी है कि एससी-एसटी घोषित वार्ड में पूरे वार्ड में कहीं भी विकास कार्य कराने के लिए राशि दी जा सकेगी। इसके लिए कोई क्षेत्र विशेष या बस्ती चिन्हित करने की बात नहीं होगी क्योंकि पूरा वार्ड ही कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा। दूसरे वार्डों के मामले में इस तरह की स्थिति कालोनी या मोहल्ला के आधार पर रहेगी। यह भी बताया गया कि विकास कार्यों की कैटेगरी में वे सभी काम शामिल किए जाएंगे जो नगरीय निकायों द्वारा निकाय में रहने वाले लोगों को उपलब्ध कराए जाते हैं।
अभी जिलों में कलेक्टर कराते हैं जनभागीदारी से काम
अभी जो व्यवस्था है उसके अनुसार शासन स्तर पर जनता की भागीदारी से कोई काम नहीं कराए जाते बल्कि जिलों में कलेक्टर अपने स्तर पर योजना समिति के कामों में जनभागीदारी सिस्टम लागू कर विकास के कार्य कराते रहते हैं। अब सरकार शासन स्तर पर इसे नगरीय क्षेत्रों में लागू करने की तैयारी में है और इसको लेकर प्रस्ताव वित्त विभाग के समक्ष पेश किया गया है जिसे विभाग प्रमुखों एसीएस, पीएस की बैठक में एप्रूवल मिलने के बाद कैबिनेट में लाया जाएगा और कैबिनेट की मंजूरी के बाद वित्त बजट में इसका समावेश किया जाएगा।