
इन सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित चुनाव आयोग ने जमकर प्रचार-प्रसार किया था और सभी को उम्मीद थी इन सीटों पर बंपर वोटिंग होगी, लेकिन चारों चरणों का मतदान प्रतिशत चौकाने वाला रहा है। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार 4.1 प्रतिशत कम मतदान हुआ है।
2019 के लोकसभा चुनाव में 73.5 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। वहीं इस बार लोकसभा चुनाव 2024 में मतदान 69.4 प्रतिशत पर ही सिमट कर रह गया है। चौथे चरण की संसदीय सीट रतलाम में मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनिता नागर सिंह चौहान, कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया के विरूद्ध चुनावी मैदान में है।
यहां अपनी पत्नी को जिताने के लिए मंत्री चौहान सहित दो अन्य मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप और निर्मला भूरिया ने भी चुनाव प्रचार किया। बावजूद इसके मतदान बढ़ाने में इसकी मेहनत रंग नहीं लाई।
अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित 10 लोकसभा सीटों में से दो पर केंद्रीय मंत्री और छह सांसद भी चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन वे अपने क्षेत्र में मतदान बढ़ाने में सफल नहीं हो सकें। शहडोल में सांसद व भाजपा प्रत्याशी हिमाद्री सिंह और कांग्रेस प्रत्याशी फुंदेलाल सिंह मार्कों आमने - सामने हैं।
मंडला में केंद्रीय मंत्री व भाजपा प्रत्याशी फग्गन सिंह कुलस्ते और कांग्रेस से ओमकार सिंह मरकाम, रतलाम में भाजपा से अनिता नागर सिंह चौहान और कांग्रेस से पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, धार में सांसद व भाजपा प्रत्याशी सावित्री ठाकुर और कांग्रेस से राधेश्याम मुवेल, खरगोन में सांसद व भाजपा प्रत्याशी गजेंद्र पटेल और कांग्रेस से पोरलाल खरते, बैतूल में सांसद व भाजपा प्रत्याशी दुर्गादास उइके और कांग्रेस से रामू टेकाम, टीकमगढ़ में केंद्रीय मंत्री व भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र कुमार खटीक और कांग्रेस से पंकज अहिरवार, देवास में सांसद व भाजपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह सोलंकी और कांग्रेस से राजेंद्र मालवीय, उज्जैन में सांसद व भाजपा प्रत्याशी अनिल फिरोजिया और कांग्रेस से राजेंद्र मालवीय चुनावी मैदान में है।
हालांकि अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित लोकसभा सीट भिंड में 0.51 प्रतिशत मतदान बढ़ा है। यहां से सांसद व भाजपा प्रत्याशी संध्या राय और कांग्रेस से फूल सिंह बरैया चुनाव लड़ रहे हैं।