
कोर्ट ने कहा कि इसके बाद भी जवाब नहीं आया तो डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। मामला छात्रा रितिका माहेश्वरी का है। उन्होंने वर्ष 2022 में एक निजी मेडिकल कॉलेज में पीजी कोर्स में प्रवेश लिया था। उन्होंने इसके लिए मोटी फीस भी चुकाई थी, लेकिन व्यक्तिगत कारणों से कुछ समय बाद उन्होंने सीट छोड़ दी।
इसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने छात्रा के अगले तीन साल तक काउंसलिंग में शामिल होने पर रोक लगा दी। छात्रा ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने इस मामले में करीब आठ माह पहले शासन को नोटिस जारी किए थे, लेकिन इसका जवाब आज तक पेश नहीं हुआ। बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा है कि शासन 14 अगस्त से पहले जवाब प्रस्तुत कर दें।
केंद्र 30 लाख रुपये जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर चुका है
छात्रा ने याचिका में कहा है कि सरकार ने पीजी कोर्स में बांड का उल्लंघन करने पर 30 लाख रुपये जमा करने के फैसले को गलत मानते हुए, इसके नियमों में बदलाव भी कर दिया है। बावजूद इसके कई मेडिकल कॉलेज सीट छोड़ने वाले छात्रों से पैनल्टी जमा करने के लिए दबाव बनाते हैं।