ट्रंप या हैरिस में कौन जीतेगा वॉइट हाउस की रेस, इन सात राज्यों से होगा इस बार का फैसला, समझें गणित

Updated on 24-10-2024 01:13 PM
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में अब सिर्फ दो सप्ताह का ही वक्त रह गया है। साल 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भी पिछले दो चुनाव की तरह की कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है। अमेरिकी पोल सर्वेक्षणों से पता चलता है कि डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस दोन मुकाबले में बने हुए हैं। इस बार वॉइट हाउस की रेस में वही बाजी मारेगा जो सात सबसे महत्वपूर्ण स्विंग स्टेट्स में अच्छी बढ़त बनाने में कामयाब होगा। स्विंग स्टेट्स उन राज्यों को कहा जाता है कि जहां पर मतदाता अभी तक ट्रंप और हैरिस के बीच फैसला नहीं कर पाए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इन सात राज्यों का चुनावी गणित कैसे वॉइट हाउस का रास्ता तय कराएगा।'

स्विंग स्टेट्स कैसे जरूरी


अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव में इस बार मिशिगन, पेंसिल्वेनिया, विस्कॉन्सिन, एरिजोना, नेवादा और नॉर्थ कैरोलिना को स्विंग स्टेट्स माना जा रहा है। चुनाव की आखिरी लड़ाई इन्हीं राज्यों में लड़ी जानी है। अमेरिका के सभी राज्यों के कुल राज्यों के 593 इलेक्टोरल कॉलेज वोट में 93 इन सात राज्यों में हैं। बाकी बचे इलेक्टोरल कॉलेज को लेकर अनुमान बताते हैं कि 226 हैरिस और 219 डोनाल्ड ट्रंप के पास जा रहे हैं। किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए 270 के जादुई नंबर पर पहुंचना होगा। ऐसे में 7 राज्यों के 93 कॉलेज वोट अहम हो जाते हैं।

ओपिनियन पोल बताते हैं कि इन राज्यों के मतदाओं ने अभी तक ये साफ नहीं किया है कि वे हैरिस और ट्रंप में किसके साथ हैं। 2020 में के इलेक्टोरल कॉलेज का फैसला पेसिल्वेनिया में एक प्रतिशत से भी कम अंतर से हुआ। न्यूयॉर्क टाइम्स के पिछले सप्ताह के सर्वेक्षण से पता चलता है कि इस बार 7 स्विंग स्टेट्स में डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस के बीच कांटे की टक्कर है। सभी राज्यों में दोनो के बीच अंतर या तो प्रतिशत में या फिर अधिकतम दो अंको का था।

पेंसिल्वेनिया पर सभी की नजर


सभी 7 स्विंग स्टेट पेंसिल्वेनिया के पास सबसे ज्यादा 19 इलेक्टोरल कॉलेज सीटे हैं। इसके चलते यह अहम हो जाता है। ट्रंप और हैरिस के साथ ही उनके सहयोगी उम्मीदवार दर्जनों बार पेंसिल्वेनिया का दौरा कर चुके हैं। इसके साथ ही यहां पर टेलीविजन विज्ञापनों से भी पहुंचने की कोशिश जारी है। अगर हैरिस पेंसिल्वेनिया हारती हैं तो नॉर्थ कैरोलिना या जॉर्जिया में किसी एक को जीतना होगा, जो एक मुश्किल काम होगा। चार दशक में केवल तीन बार डेमोक्रेट्स को यहां जीत मिली है।

अगर ट्रंप पेंसिल्वेनिया हारते हैं तो उन्हे विस्कॉन्सिन या मिशिगन में से एक को जीतना होगा। 2016 में ट्रंप को इन दोनों राज्यों में जीत मिली थी और वह 1980 के बाद ऐसा करने वाले पहले रिपब्लिकन नेता थे। रिपोर्ट बताती हैं कि हैरिस और ट्रंप की चुनाव अभियान टीम और उनके सहयोगियों ने 7 अक्टूबर तक टेलीविजन विज्ञापन पर 27.9 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं। वहीं, मिशिगन में 20.4 करोड़ डॉलर खर्च किए गए हैं।

क्या कहते हैं पिछले आंकड़ें?


इस बार के 7 स्विंग स्टेट्स में पांच ऐसे हैं, जिन्होंने साल 2020 में बाइडन के लिए तो 2016 में ट्रंप के लिए वोट किया था। ये राज्य हैं- एरिजोना, जॉर्जिया, मिशिगन, पेंसिल्वेनिया और विस्कॉन्सिन। साल 2020 में इन सभी राज्यों में तीन प्रतिशत या उससे कम के अंतर से जीत मिली थी। नेवादा और नॉर्थ कैरोलिना का नाम भी स्विंग स्टेट की लिस्ट में शामिल है। हालांकि, ये लिस्ट बदलती रही है। 1992 के बाद से 30 राज्य लगातार चुनावों में अलग-अलग पार्टियों को वोट देते रहे हैं। 1992 के चुनाव में सबसे ज्यादा राज्यों ने पाला बदला था और पिछली बार के मुकाबले नई पार्टी को मौका दिया था।

डेमोक्रेट के गढ़ में ट्रंप ने लगाई थी सेंध


दूसरी तरफ वाशिंगटन डीसी समेत 20 राज्य ऐसे हैं, जहां पर 1988 के बाद से हर चुनाव में एक ही पार्टी को जीत मिलती रही है। मिशिगन, पेंसिल्वेनिया और विस्कॉन्सिन के डेमोक्रेट्स को समर्थन देने के लिए ब्लू वॉल के रूप में जाना जाता है। हालांकि, साल 2016 में ट्रंप ने इन सभी राज्यों में करीबी अंतर से जीत हासिल कर ली थी। 2020 में बाइडन ने दोबारा यहां डेमोक्रेट्स की वापसी कराने में सफलता हासिल की थी।

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